बहुत पुरानी बात है। हमारे देश में एक बादशाह हुए हैं जिनका नाम था कुतुबुद्दीन ऐबक। जिन्होंने दिल्ली में स्थित कुतुब मिनार बनाई थी। उन्हीं के समय की एक कहानी है। राजा कुतुबुद्दीन ऐबक एक मुगल बादशाह थे। वह अपने राजपाठ को केवल राजकोष से ही चलाते थे। परंतु अपने परिवार का लालन-पालन अपने हाथ से लिखी हुई कुरान की कमाई से ही करते थे। एक बार राजा कई महीनों तक बीमार पड़ गये। उस समय उन्होंने कोई किताब नहीं लिखी। जिससे उनके पास रहने वाले एक नौकर की तनखा तीन-चार महीनों की हो गई। उसी दौरान उस नौकर के घर से खत आया कि आपकी माता जी बीमार हैं उन्होंने आपको बुलाया है। परंतु नौकर की तनखा नहीं मिली थी। इस कारण से वह अपने घर महीनों से नहीं गया था। अब नौकर के सामने बड़ी मुसीबत थी। इधर उसका राजा बीमार और उधर उसकी मां बीमार अब वह करे तो क्या करे। अंत में वह राजा के पास गया और बोला राजा साहब मुझे अपने घर जाना है क्योंकि मेरी माता जी बहुत बीमार हैं घर से खत आया है। मेरी तनखा दे दीजिए। राजा नौकर की बात सुनकर बहुत दुखी हुए। परंतु कुछ कह न सके। अंत में वह उठे और घर के अंदर जाकर रखे दो रूपये उसे लाकर दे दिये। नौकर ने वह पैसे चुपचाप अपने पास रख लिये। अब नौकर सोचने लगा कि राजा के पास इतनी धन दौलत है फिर भी इन्होंने मुझे मेरी सारी तनखा नहीं दी। वह सोच में पड़ गया। परंतु उसे नहीं पता था कि राजा अपनी हाथ से कुरान लिखते थे और उन्हें बाजार में बेचा जाता था उससे मिलने वाले धन से वह अपना परिवार चलाते थे। नौकर दो रू0 लेकर अपने घर को चल दिया।
नौकर को चलते-चलते दिन ढलता चला गया। जैसे ही वह दूसरे नगर में पहुंचा तो वहां एक आदमी अपने सिर पर टोकरा रखकर उसमें अनार आवाज लगाकर बेच रहा था। एक पैसे के दो अनार ले लो। अब नौकर को जैसे ही उसकी आवाज सुनाई दी उसने अनार वाले को अपने पास बुलाया। वह समझ गया था कि हमारे नगर में अनार नहीं मिलते हैं। मैं ये सारा टोकरा भरा हुआ अनार ले सकता हूं। उस नौकर ने अनार से भरा टोकरा खरीद लिया और अपने सिर पर रखकर अपने घर की ओर चल दिया। रास्ते में दूसरा नगर पड़ता था। वहां यह ढंढोरा पीटा जा रहा था कि राजा की रानी बीमार है यदि उसे कोई एक या दो अनार के फल लाकर देगा उसे मुंह मांगा ईनाम दिया जायेगा। उस मनादी को सुनकर नौकर बहुत खुश हुआ। वह बोला मेरे पास बहुत अनार हैं। मुझे राजा के पास ले चलो। मनादी करने वाला युवक उसे अपने राजा के दरबार में ले गया। राजा ने अनार अपनी रानी को खाने के लिये दिया जिसे खाकर रानी ठीक हो गई। राजा ने अनार के बदले उस नौकर को बहुत से सोने चांदी के जेवरात दिये जिससे वह धनवान बन गया और अपने परिवार का पालन पोषण ठीक प्रकार से करने लगा वह अब बहुत सुखी था। कहानी का तात्पर्य यह है कि नेकी की एक रू0 की कमाई आपको वो सुख शांति दे सकती है जिसे आप बेसुमार दौलत होते हुए भी नहीं खरीद सकते।
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