1. एक दिसम्‍बर 2017 को, यूनिट को केरल के तिरुवनन्‍तपुरम पश्चिमी क्षेत्र में चक्रवाती तूफान ओखी’ की दिशा में एचएडीआर मिशन का दायित्‍व सौंपा गया। उन्‍होंने मिशन के लिए खुद को पेश किया और इस भूमिका के लिए वायुयान की समयबद्ध तैयारी सुनिश्चित की। मिशन के गहन महत्‍व और एक से अधिक संकटग्रस्‍त लोगों को राहत पहुंचाने की आवश्‍यकता महसूस करते हुए सार्जंट झा ने हार्नेस’ की जगह स्‍ट्रोप’ के उपयोग का सुझाव दियाक्‍योंकि इससे समय बचता और संकटग्रस्‍त लोगों को त्‍वरित राहत पहुंचता। इस मिशन के लिए तथा समुद्र से संकटग्रस्‍त लोगों को बचाने में सहायता के लिए कोई नौसैनिक गोताखोर उस वक्‍त उपलब्‍ध नहीं था। उन्‍होंने एक तकनीकी जवान से घिरनी को परिचालित करने का आग्रह किया और खुद को आवश्‍यकता पड़ने पर नौसैनिक गोताखोर का दायित्‍व संभालने का निर्णय किया। समुद्र में उस समय ऊंची लहरें उठ रही थीं और एक अनुभवहीन तैराक होने के बावजूद सार्जंट झा संकटग्रस्‍त लोगों को बचाने के लिए खुद समुद्र में गोता लगाने से नहीं झिझके। यह महसूस करते हुए कि राहत कार्य के दौरान स्‍ट्रोप’ का उपयोग अनुभवहीन नागरिकों के लिए दुर्घटना का कारण बन सकता हैसार्जंट झा उस दिन पहले मिशन में घिरनी पर अपने साथ व्‍यक्तिगत रूप से पांच संकटग्रस्‍त लोगों को बचाकर लाए। अपने दूसरे मिशन पर उन्‍होंने डूबी हुई नौकाओं से पांच और मछुआरों को सुरक्षापूर्वक बचाने में नौसैनिक गोताखोर की सहायता की।
  2. जीवन पर खतरा मंडराने की स्थिति में असाधारण साहस एवं वीरता का परिचय देने  तथा 10 मछुआरों की जान बचाने के उनके कार्य के फलस्‍वरूपसार्जंट अमित कुमार झा को वायु सेना पदक (वीरता) पुरस्‍कार प्रदान किया जाता है।   

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