आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले में एक इस्पात संयंत्र की स्थापना के लिए व्यवहार्यता रिपोर्ट की तैयारी के सिलसिले में भारत सरकार अत्यधिक ध्यान दे रही है। आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत प्रतिबद्धता के अनुसार भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (एसएआईएल) व्यवहार्यरता रिपोर्ट तैयार की है। राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए विभिन्न विवरणो के आधार पर इस परियोजना को व्यवहार्य नहीं पाया गया।

व्यवहार्यता की कमी के बावजूद, इस्पात मंत्रालय ने नव-सृजित आंध्र प्रदेश राज्य के हितों ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त तत्परता दिखाई। इसने राज्य सरकार के प्रतिनिधियों और इस्पात उद्योग से जुड़े अन्य तकनीकी लोगों को मिलाकर एक उच्च स्तरीय कार्य बल गठित किया। इस कार्य बल ने सावधिक तौर पर कई बैठके आयोजित की। इसकी अंतिम बैठक 17 दिसंबर, 2018 को हुई थी। इसके अलावा, इस्पात मंत्री चौधरी बीरेन्द्र सिंह ने आवश्यक तत्परता और व्यवहार्यता रिपोर्ट को अंतिम रूप देने की दिशा में सभी संभावनाओं का शीघ्रतापूर्वक पता लगाने के क्रम में आंध्र प्रदेश के जन-प्रतिनिधियों सहित सभी हितधारकों के साथ इस विषय पर निरंतर बैठके आयोजित की हैं।
राज्य सरकार ने अब तक इस प्रस्तावित इस्पात संयंत्र के लिए खनिजों और लौह अयस्क की उपलब्धता के बारे में आवश्यक विवरण नहीं दिया है। लौह अयस्क संसाधन की उपलब्धता का पता लगाने के लिए ओबुलापुरम खान में खोज कार्य राज्य सरकार ने खुद ही भारतीय भूगर्भ विज्ञान सर्वेक्षण (जीएसआई) को काम पर लगाया है, जो व्यवहार्यता रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में एक पूर्व-शर्त है। कार्य बल द्वारा भेजे गए कई स्मरण पत्रों और समीक्षाओं के बावजूद राज्य सरकार ने अब तक यह विवरण नहीं दिया है।
कार्य बल ने व्यवहार्यता रिपोर्ट का मसौदा तैयार करने के लिए अग्रणी इस्पात परामर्शक कम्पनी- मेकॉन को काम पर लगाया है। मसौदा रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के क्रम में यह विवरण प्राप्त करने के लिए मेकॉन काम में लगा है। इसका ज्यादातर काम हो चुका है। केवल खनिजों और लौह अयस्क की उपलब्धता पर आधारित विवरण मिलना बाकी है। कार्य बल की सात बैठकों के बावजूद राज्य सरकार से यह विवरण नहीं मिला है, जो इस काम के लिए अनिवार्य है। राज्य सरकार खान के प्रकार, लौह अयस्क भंडारों की मात्रा और गुणवत्ता के बारे में वास्तविक स्थिति प्रस्तुत नहीं कर रही है।
एक बार फिर यह दोहराया जाता है कि राज्य सरकार द्वारा यह विवरण उपलब्ध कराने के बाद ही मेकॉन द्वारा जल्द से जल्द व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की जा सकेगी। उसके बाद राज्य के लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए निवेश के तौर-तरीके को अंतिम रूप दिया जा सकेगा।
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