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जीएसटी दरों में कमी के कारण 31 दिसंबर, 2018 तक संशोधित एमआरपी प्रदर्शित करने की अनुमति

भार एवं माप इकाई
(1) उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और कारोबारी सुगमता के लिए लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्‍ड कमोडिटीज) रूल्‍स, 2011 में संशोधन किए गए जो 01. 01. 2018 से प्रभावी हुआ। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर विक्रेता द्वारा प्रदर्शित वस्‍तुओं के लिए इस नियमों के तहत घोषणा करने की आवश्‍यकता होगी।

Ø इन नियमों में विशेष तौर पर उल्लेख किया गया है कि कोई भी व्‍यक्ति किसी एक प्री-पैकेज्‍ड वस्‍तु पर अलग-अलग एमआरपी (दोहरी एमआरपी) घोषित नहीं करेगा।
Ø घोषणा करने के लिए अक्षरों एवं अंकों का आकार बढ़ा दिया गया है ताकि उपभोक्ता आसानी से उसे पढ़ सके।
Ø शुद्ध मात्रा की जांच को कहीं अधिक वैज्ञानिक बनाया गया है।
Ø स्‍वैच्छिक आधार पर बार कोड/ क्यूआर कोडिंग की अनुमति दी गई है।
Ø खाद्य उत्पादों पर घोषणाओं के बारे में प्रावधानों की खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत विनियमन के साथ सुसंगत बनाया गया है।
Ø जिन चिकित्सा उपकरणों को दवा के रूप में घोषित किया गया है उन्‍हें इन नियमों के तहत घोषणाओं के दायरे में लाया गया है।
Ø उद्योग और उसके प्रतिनिधि संगठनों का कहना है कि उनके पास डिब्‍बाबंद उत्‍पादों की काफी इन्‍वेंटरी मौजूद है। इसे ध्‍यान में रखते हुए विभाग ने उन्‍हें इन्‍वेंटरी में मौजूद उत्‍पादों पर स्टिकर चिपकाकर अथवा मुहर लगाकर अथवा ऑनलाइन प्रिंटिंग अथवा 31.7.2018 तक टैग का उपयोग करते हुए संशोधित नियमों के तहत घोषणा करने की अनुमति दी थी। इसके अलावा सुचारू तरीके से बदलाव और कारोबारी सुगमता के लिए राज्य सरकारों के विधिक माप नियंत्रकों को सलाह जारी की गई है कि फोंट के आकार के लिए 31.7.2018 तक उद्योग के खिलाफ उपचारात्‍मक कार्रवाई न की जाए।

(2) जीएसटी दरों में कमी के कारण 31 दिसंबर, 2018 तक संशोधित एमआरपी प्रदर्शित करने की अनुमति:
Ø जीएसटी को 1 जुलाई, 2017 से लागू किए जाने के कारण कुछ ऐसे मामले भी हो सकते हैं जहां प्री-पैकेज्‍ड वस्‍तुओं के खुदरा विक्रय मूल्य को बदलना आवश्यक है। इस संदर्भ में विनिर्माताओं या पैकिंग करने वालों या प्री-पैकेज्‍ड वस्तुओं के आयातकों को 1 जुलाई 2017 से 30 सितंबर 2017 तक तीन महीने के लिए मौजूदा खुदरा विक्रय मूल्य (एमआरपी) के साथ-साथ संशोधित खुदरा विक्रय मूल्य (एमआरपी) घोषित करने की अनुमति थी। संशोधित खुदरा विक्रय मूल्य (एमआरपी) की घोषणा स्टिकर या मुहर या ऑनलाइन प्रिंटिंग के जरिये की जा सकती थी।
Ø आवश्यक सुधार करने के बाद 30 सितंबर 2017 तक लंबे समय तक खत्‍म न होने वाली पैकेजिंग सामग्री/ रैपर के उपयोग की भी अनुमति दी गई थी।
Ø इस अनुमति में कुछ और समय के लिए विस्तार दिए जाने के संबंधी अनुरोधों को ध्यान में रखते हुए मुहर या स्टिकर या ऑनलाइन प्रिंटिंग के माध्यम से जीएसटी लागू होने के कारण संशोधित एमआरपी प्रदर्शित की समय सीमा को 31 मार्च, 2018 तक बढ़ा दिया गया था।
Ø जब सरकार ने कुछ खास वस्तुओं पर जीएसटी की दरों को कम किया तो लीगल मेटरोलॉजी (डिब्‍बाबंद वस्‍तुएं) नियम, 2011 के नियम 6 के उप-नियम (3) के तहत अतिरिक्त स्टिकर या मुद्रांकन या ऑनलाइन प्रिंटिंग के लिए अनुमति दी गई थी ताकि प्री-पैकेज्‍ड वस्‍तुओं पर घोषित एमआरपी को कम किया जा सके। इस मामले मेंएमआरपी के पुराने लेबल/ स्टिकर को भी दिखने योग्‍य जारी रखा गया।
Ø यह छूट 1 जुलाई, 2017 के बाद विनिर्मित/ डिब्‍बाबंद/ आयातित बिक न पाने वाले स्टॉक के मामले में भी लागू होगी जहां जीएसटी दरों को कम किए जाने के कारण 1जुलाई, 2017 से एमआरपी कम हो जाएगा।
Ø उपरोक्‍त अनुमति/ छूट 31 मार्च, 2018 तक बढ़ा दी गई थी।
Ø चूंकि सरकार ने कुछ निर्दिष्ट वस्तुओं पर जीएसटी की दरों को घटा दिया हैइसलिए 31 दिसंबर, 2018 तक प्री-पैकेज्‍ड वस्‍तुओं पर कम एमआरपी घोषित करने के लिए अतिरिक्त स्टिकर या मुहर या ऑनलाइन प्रिंटिंग को लागू करने के लिए अनुमति दी गई है। हालांकिएमआरपी का पिछला लेबल/ स्टिकर दिखना जारी रहेगा।
Ø यह छूट बिन बिके विनिर्मित/ पैकेज्‍ड/ आयातित स्टॉक के मामले में भी लागू होती है जहां जीएसटी की दर में कटौती के कारण एमआरपी 27 जुलाई 2018 से कम हो जाएगा। विनिर्माता या पैकर या आयातक द्वारा यदि किसी पैकेजिंग सामग्री या रैपर की खपत न की जा सकी हो तो उसका उपयोग 31 दिसंबर, 2018 या पैकिंग सामग्री या रैपर के खत्‍म होने की तिथि में से जो भी पहले हो, तक जीएसटी में कमी के कारण खुदरा बिक्री मूल्य (एमआरपी) में मुहर या स्टिकर या ऑनलाइन प्रिंटिंग के जरिये आवश्‍यक सुधार के साथ किया जा सकता है।

(3) राज्य सरकारों को मदद:
Ø वजन एवं माप कानूनों के प्रभावी प्रवर्तन के लिए राज्यों/ केंद्रशासित प्रदेशों को प्रयोगशाला भवन के निर्माण के लिए अनुदान राशि जारी की गई।
Ø उपभोक्ताओं को सही मात्रा में डिलिवरी सुनिश्चित करने के लिए वजन एवं माप के उपकरणों का मुहर के साथ सत्‍यापन के लिए राज्य सरकारों को कानूनी मानक उपकरण प्रदान किए गए हैं।
Ø नई दिल्‍ली के राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला में राज्‍य सरकारों के प्रवर्तन अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए।

(4) अहमदाबाद, बैंगलोर, भुवनेश्वर, फरीदाबाद एवं गुवाहाटी के क्षेत्रीय निर्देश मानक प्रयोगशालाओं (आरआरएसएलऔर रांची के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल मेट्रोलॉजी के लिए पहल की गई।
Ø सभी आरआरएसएल और रांची के इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ लीगल मेट्रोलॉजी को नेशनल एक्रिडिएशन बोर्ड ऑफ लेबोरेटरीज (एनएबीएल) द्वारा मान्यता प्रदान की गई है।
Ø उत्तर प्रदेश के वाराणसी और महाराष्ट्र के नागपुर में दो नए क्षेत्रीय निर्देश मानक प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं। दोनों प्रयोगशालाओं के लिए भूमि की खरीद संबंधित राज्य सरकारों से पहले ही हो चुकी है और निर्माण कार्य शुरू होना अभी बाकी है।
Ø बेंगलूरु के क्षेत्रीय निर्देश मानक प्रयोगशाला का उन्नयन प्रगति पर है और इसे लीगल मेट्रोलॉजी क्षेत्र की बेहतरीन अंतर्राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के समान तैयार किया जाएगा।

(5) एडवाइजरी जारी की गई:
(i) उपभोक्‍ताओं के हितों को ध्‍यान में रखते हुए अधिक वसूली और दोहरी एमआरपी के लागू करने के लिए सभी राज्यों/ केंद्रशासित प्रदेशों के लीगल मेट्रोलॉजी नियंत्रकों को एडवाइजरी जारी की गई है और राज्‍य सरकारों द्वारा इस पर कार्रवाई की जा रही है।
(ii) उपभोक्‍ताओं के हितों की रक्षा के लिए सभी चिकित्सा उपकरणों पर एमआरपी सहित सभी घोषणाओं को सुनिश्चित करने के लिए सभी राज्य सरकारों को एडवाइजरी जारी की गई है।
(iii) यह अनुमति एकल ब्रांड खुदरा व्‍यापारिक उपक्रमों के संदर्भ में 04.12.2017 को आदेश संख्या डब्‍ल्‍यूएम-10 (54) / 2016 के तहत खुदरा विक्रय मूल्‍य की घोषणा के तरीके को आसान बनाती है और इसे 31.07. 2019 तक बढ़ा दिया गया है।
(iv) ब्‍लेंडेड खाद्य वनस्पति तेल सहित खाद्य वनस्पति तेल की बिक्री/ वितरण के लिए लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्‍ड वस्‍तुओं) नियम, 2011 के अनुपालन के लिए सभी राज्यों/ केंद्रशासित प्रदेशों के लीगल मेट्रोलॉजी नियंत्रकों को एडवाइजरी जारी की गई थी।

(6) पेट्रोल/ डीजल डिस्पेंसर में धोखाधड़ी को रोकने के लिए की गई कार्रवाई:
(1) ई-सीलिंग: पेट्रोल पंपों पर डिस्‍पेंसर में हेराफेरी को रोकने के लिए राज्‍य सरकारों के लीगल मेट्रोलॉजी के अधिकारियों, तेल विपणन कंपनियों के प्रतिनिधियों, मूल उपकरण विनिर्माताओं और केंद्र सरकार के लीगल मेट्रोलॉजी अधिकारियों के साथ पेट्रोल/डीजल के खुदरा आउटलेट पर पायलट आधार पर ई-सीलिंग शुरू की गई है।
(2) मूल उपकरण विनिर्माताओं को निम्नलिखित सुविधाओं के लिए मौजूदा डिस्पेंसर को अपग्रेड करने के लिए भी कहा गया है:
(i) किसी भी हार्डवेयर बदलाव, पल्सर सत्यापन और कैलिबरेशन के लिए ओटीपी सृजित होने की सुविधा।
(ii) मौजूदा पल्सर को न खेलने वाले, खुद खराब हो जाने वाले चुंबकीय पल्सर से बदलने की योजना।
(iii) पारिवारिक अखंडता बरकरार रखना।
(iv) सॉफ्टवेयर एन्क्रिप्शन को अपग्रेड करना।
(3) खुदरा आउटलेटट पर पर्यावरण स्‍वच्‍छता और पेट्रोल वाष्‍प में कीमी के लिए वैपर रिकवरी सिस्‍टम को स्‍थापित करने की मंजूरी दी गई थी।

(7) समय प्रसार:
Ø देश में भारतीय मानक समय के प्रसार के लिए इस विभाग द्वारा बजटीय प्रावधान किया गया है ताकि एनपीएल के सहयोग से अहमदाबादबेंगलूरु, भुवनेश्वर, फरीदाबाद और गुवाहाटी के पांच क्षेत्रीय निर्देश मानक प्रयोगशालाओं के जरिये इसका प्रसार किया जा सके।
Ø किसी भी मात्रात्मक माप के लिए सात बुनियादी इकाइयां हैं जो इकाइयों की अंतरराष्ट्रीय प्रणाली (एसआई यूनिट) में द्रव्यमान के लिए किलोग्रामलंबाई के लिए मीटरसमय के लिए सेकेंडविद्युत प्रवाह के लिए एम्पियर, तापमान के लिए केल्विन, हल्की तीव्रता के लिए कैंडेला और पदार्थ की मात्रा के लिए मोल है। भार और माप की इकाइयों के लिए प्रावधान लीगल मेट्रोलॉजी एक्‍ट 2009 में दिए  गए हैं।
Ø भारत में समय का प्रसार जो सात बुनियादी इकाइयों में से एक है, को  केवल एक स्तर पर नई दिल्‍ली के एनपीएल द्वरा अनुरक्षित किया जा रहा है। वर्ष 2016 में मंत्रिमंडलीय सचिवालय द्वारा गठित विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर सचिवों के समूह ने सिफारिश की कि, 'वर्तमान में भारतीय मानक समय (आईएसटी) को सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) और 'इंटरनेट सेवा प्रदाता' (आईएसपी) द्वारा अनिवार्य रूप से अपनाया नहीं जा रहा है। विभिन्न प्रणालियों में समय की समानता न होने से कानून प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) को साइबर अपराध की जांच करने में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए देश के भीतर सभी नेटवर्को एवं कंप्यूटरों को एक राष्‍ट्रीय घड़ी के साथ सिंक्रोनाइज करना आवश्‍यक है,  विशेष तौर पर सामरिक क्षेत्र एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के वास्तविक समय आधारित अनुप्रयोगों के लिए।
Ø सटीक समय प्रसार के साथ-साथ सटीक सिंक्रोनाइजेशन का सभी सामाजिकऔद्योगिकसामरिक एवं अन्य क्षेत्रों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है, जैसे- पावर ग्रिड के फेल होने परअंतर्राष्ट्रीय व्यापारबैंकिंग व्‍यवस्‍थासड़क एवं रेलवे में स्वचालित सिग्‍नल व्‍यवस्‍थामौसम का पूर्वानुमानआपदा प्रबंधनजमीन के भीतर प्राकृतिक संसाधनों की खोज के लिए एक दमदारभरोसेमंद और सटीक समय प्रणाली की आवश्यकता होती है।

मूल्य स्थिरीकरण निधि (पीएसएफ)
• प्रभावी बाजार हस्‍तक्षेप और दलहन की कीमतों में स्थिरता लाने के लिए घरेलू खरीद एवं आयात के जरिये 20.50 लाख मीट्रिक टन तक का बफर स्‍टॉक तैयार किया गया है।
कुल 20.50 लाख मीट्रिक टन में से 16.73 लाख मीट्रिक टन के निपटान के बाद फिलहाल 3.77 लाख मीट्रिक टन दाल बफर के लिए उपलब्‍ध है। इसमें से 3.79 लाख मीट्रिक टन दालों का आयात किया गया और 16.71 लाख मीट्रिक टन दालों की खरीद घरेलू बाजार से की गई थी।
घरेलू स्‍तर 16.71 लाख मीट्रिक टन दालों की खरीद की गई जिसमें से 13.67 लाख मीट्रिक टन दालों की खरीद वर्ष 2016-17 और वर्ष 2017-18 के दौरान एमएसपी पर की गई जिससे  8.49 लाख किसान लाभान्वित हुए।
प्याज की कीमतों को स्थिर करने के लिए नेफेडएसएफएसी और एमएमटीसी के माध्यम से प्याज की खरीद और आयात किए गए।
• वर्ष 2018-19 में पीएसएफ के तहत 13,508 मीट्रिक टन प्याज की घरेलू खरीद हुई।
• वर्ष 2017-18 में 5,131 मीट्रिक टन प्याज की घरेलू खरीद हुई थी।
• बफर स्‍टॉक से दालों का उपयोग राज्यों को उनकी योजनाओं के तहत वितरण के लिए आपूर्ति करने में किया जा रहा है। केंद्र सरकार के मंत्रालयों/ विभागों की भी पोषण घटक वाली योजनाएं हैं जो सीधे तौर अथवा निजी एजेंसियों के जरिये आतिथ्य सेवाएं मुहैया कराती हैं।
• इसके अलावाबफर स्‍टॉक से दालों का इस्‍तेमाल सेना और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की दाल जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जा रहा है। अफगानिस्तान को दी गई खाद्य सहायता के साथ-साथ केरल में बाढ़ राहत उपायों के लिए खाद्य सहायता भी प्रदान की गई। बाजार में नीलामी के जरिये भी दालों को निपटाया जा रहा है।
• इन हस्तक्षेपों के साथ-साथ यह सुनिश्चित किया गया कि पूरे साल दालों और प्याज की कीमत उचित स्तर पर बरकरार रहे।
• मूल्य निगरानी प्रकोष्‍ठ (पीएमसी) का सुदृढीकरण:
वित्‍त वर्ष 2018-19 से आगे राज्य स्तर पर मूल्य निगरानी प्रकोष्‍ठ (पीएमसी) को सुदृढ़ बनाने के लिए वित्‍तीय मदद का भी प्रावधान किया गया है। इनमें डेटा एंट्री ऑपरेटर (डीईओ) के स्तर पर एक संविदात्मक कर्मचारी के लिए पारिश्रमिक और मूल्य संग्रह के लिए जियोटैगिंग सुविधाओं और सिम कार्ड के साथ एक हैंडहेल्ड डिवाइस का प्रावधान शामिल है।

उपभोक्ता संरक्षण इकाई
संसद में 5 जनवरी, 2018 को उपभोक्ता संरक्षण विधेयक 2018 को पेश किया गया। इस विधेयक की प्रमुख बातें इस प्रकार हैं: -
i) मौजूदा अधिनियम को सुदृढ़ बनाना
ii) उपभोक्ता शिकायतों का तेजी से निवारण
iii) उपभोक्ताओं को सशक्त बनाना और
iv) बाजार के मौजूदा बदलाव के अनुरूप कानूनों का आधुनिकीकरण।

भारतीय मानक के ब्यूरो (बीआईएस)
भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम 2016 को 12 अक्टूबर 2017 से लागू किया गया था। यह भारतीय मानक ब्यूरो को भारत के राष्‍ट्रीय मानक निकाय के रूप में स्थापित करता है। बीआईएस अधिनियम के तहत निम्नलिखित नियम एवं विनियम अधिसूचित किए गए हैं:
1. बीआईएस (अनुरूपता आकलन) विनियम, 2018 को 4 जून 2018 को अधिसूचित किया गया।
2. बीआईएस (सलाहकार समितियां) विनियम, 2018 को 7 जून 2018 को अधिसूचित किया गया।
3. बीआईएस (हॉलमार्किंग) विनियम, 2018 को 14 जून 2018 को अधिसूचित किया गया।
4. बीआईएस नियम, 2018 को 25 जून 2018 को अधिसूचित किया गया।
5. बीआईएस (महानिदेशक की शक्तियां और कर्तव्य) विनियम, 2018 को 29वीं अगस्‍त 2018 को अधिसूचित किया गया।
6. बीआईएस (संशोधन) नियम, 2018 को 6 नवंबर 2018 को अधिसूचित किया गया।
उपर्युक्त के अलावा, 14 जून 2018 को हॉलमार्क के साथ चिह्न वाले मूल्‍यवान धातु के रूप में सोना और चांदी की कलाकृतियों को भी अधिसूचित किया गया है।

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