दृश्यता सीमा से बाहर तक हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल अस्त्र’ का 26 सितंबर से 3 अक्‍टूबर के बीच वायुसेना ने बालासोर के एकीकृत प्रक्षेपण केन्‍द्र से कई सफल प्राय परीक्षण किए।
परीक्षण में मिसाइल से लंबी और मध्‍यम दूरी तक मानवरहित लक्ष्यों पर सटीक निशाना साधा गया। इस दौरान मिसाइल की डाटालिंक प्रणाली सहित सभी उप प्रणालियों के प्रदर्शन का आंकलन किया गया। वायुसेना में शामिल किए जाने के पूर्व अस्‍त्र मिसाइल का विभिन्न प्रक्षेपण स्थितियों में छह बार परीक्षण किया जा चुका है। इस दौरान मिसाइल ने अपने लक्ष्‍यों पर सटीक निशाना साधा और परीक्षण के सभी उद्देश्य पूरे किए।

भारतीय वायु सेना के सक्रिय सहयोग से भारतीय रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित इस मिसाइल को सुखोई-30 विमानों में लगाने के लिए बनाया गया है। हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड सुखोई-30 में इस मिसाइल को लगाने के लिए कई तरह के बदलाव कर रहा है। इस मिसाइल को बनाने के काम में 50 निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग शामिल हैं।
रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने मिसाइल के सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ, भारतीय वायु सेना और हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और सहयोगी कम्पनियों को बधाई दी है।
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