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पर्यावरण योगदान के लिए भारत और फिनलैंड के बीच समझौता

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने पर्यावरण योगदान के लिए भारत और फिनलैंड के बीच समझौता-ज्ञापन को मंजूरी दे दी है। इस समझौता-ज्ञापन से दोनों देशों के बीच समानता, आदान-प्रदान और पारस्परिक लाभ के आधार पर पर्यावरण सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए दीर्घकालीन सहयोग तथा नजदीकी प्रोत्साहन को बल मिलेगा। इसके मद्देनजर दोनों देशों में लागू कानून और कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखा जाएगा।

      समझौता ज्ञापन से आशा की जाती है कि इसके जरिए बेहतर पर्यावरण सुरक्षा, बेहतर संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के बेहतर प्रबंधन और वन्यजीव सुरक्षा/संरक्षण के क्षेत्र में आधुनिक प्रौद्योगिकियों एवं उत्कृष्ट व्यवहारों को प्राप्त किया जा सकेगा।
      समझौता ज्ञापन में सहयोग के निम्नलिखित क्षेत्र शामिल हैं-
i)     वायु और जल प्रदूषण रोकथाम और शुद्धिकरण, दूषित मिट्टी का उपचार
ii)    घातक कचरे को शामिल करते हुए कचरा प्रबंधन, और कचरे-से-बिजली प्रौद्योगिकियां
iii)    वृत्तीय अर्थव्यवस्था प्रोत्साहन, कम कार्बन वाले उपाय और वनों सहित प्राकृतिक संसाधनों का सतत् प्रबंधन
iv)    जलवायु परिवर्तन
v)    पर्यावरण और वन निगरानी तथा डाटा प्रबंधन
vi)    समुद्री और तटीय संसाधनों का संरक्षण
vii)   महासागरीय/समुद्री द्वीपों का समग्र प्रबंधन, तथा
viii)   आपस में तय किए जाने वाले अन्य क्षेत्र
पृष्ठभूमिः
      पर्यावरण की बढ़ती हुई समस्या सिर्फ किसी एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे पूरी दुनिया को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। भारत विस्तृत तटीय रेखा और समृद्ध जैव-विविधता से भरपूर विश्व की उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। फिनलैंड में वायु और जल प्रदूषण जैसी प्रमुख पर्यावरण समस्याएं हैं। इनके अलावा वहां वन्यजीव संरक्षण की भी समस्या है। फिनलैंड की प्रमुख पर्यावरण एजेंसी वहां का पर्यावरण मंत्रालय है, जिसकी स्थापना 1983 में हुई थी। वहां घरेलू और आसपास के देशों के उद्योगों से पैदा होने वाला प्रदूषण, वहां हवा और पानी की शुद्धता को प्रभावित कर रहा है। फिनलैंड को जल प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों की बढ़ती मांग जैसी चुनौतियों का भी सामना है। दोनों देशों को अशुद्ध जल प्रबंधन, लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण, वायु एवं जल प्रदूषण नियंत्रण तथा प्राकृतिक संसाधनों की बढ़ती मांग जैसी कई पर्यावरण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
      इस आपातस्थिति को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों ने तय किया है कि पर्यावरण की बढ़ती समस्याओं से निपटने के लिए आपस में मिलकर पर्यावरण सुरक्षा तथा प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के क्षेत्र में नजदीकी और दीर्घकालिक सहयोग किया जाए। इसके अलावा बेहतर पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में आधुनिक प्रौद्योगिकियों तथा उत्कृष्ट व्यवहारों को अपनाया जाए।