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स्वच्छ भारत मिशन में शानदार कामयाबी के सटीक दावे

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती समारोह के अवसर पर यह मिशन कार्यान्वयन के अपने पांचवें और अंतिम वर्ष में पहुंच गया है। एसबीएम जमीनी स्तर पर सूचना, शिक्षा एवं संचार का उपयोग करके विशाल जन आंदोलन में बदल गया है जिससे यह एक व्यवहार परिवर्तन का अभियान बन गया है।

भारत के लिए स्वच्छता कार्यक्रम कोई नई घटना नहीं है, यह कार्यक्रम 1981 से चलाया जा रहा है।

हालांकि, कुछ रिपोर्ट ने गलत दावों के साथ एसबीएम के जमीनी स्तर पर प्रगति के दावों को कमजोर किया है। इस संबंध में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय निम्नलिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करता है।

प्रगति

पिछले 4 वर्षों में एसबीएम में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के व्यक्तिगत नेतृत्व के तहत बड़े स्तर पर व्यवहार परिवर्तन अभियान और जमीनी स्तर पर लोगों के अभियान के नेतृत्व में जबर्दस्त प्रगति देखी गई है।

इस कार्यक्रम की शुरुआत के बाद, भारत का ग्रामीण स्वच्छता कवरेज अक्टूबर 2014 के 39 प्रतिशत से बढ़कर आज 95 प्रतिशत हो गया है। इस मिशन के तहत लगभग 8.7 करोड़ घरेलू शौचालयों का निर्माण किया गया है। जिसका परिणाम, 25 राज्य/संघ शासित प्रदेशों, 529 जिले और 5,09,067 गांवों ने खुद को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया है।

इस साल के शुरू में, विश्व बैंक समर्थन परियोजना के तहत आयोजित राष्ट्रीय वार्षिक ग्रामीण स्वच्छता सर्वेक्षण (एनएआरएसएस) में पाया गया कि ग्रामीण भारत के घरों में 93.4 प्रतिशत लोगों द्वारा शौचालय का इस्तेमाल करते हैं और इससे पता चलता है कि जमीनी स्तर पर बदलाव हो रहा है। इस सर्वेक्षण में भारत के राज्य/केन्द्रशासित प्रदेशों के 6136 गांवों के 92040 परिवारों को शामिल किया गया था।

स्वच्छ भारत मिशन दुनिया का सबसे बड़ा सार्वजनिक वित्त पोषित स्वच्छता कार्यक्रम है। केन्द्र और राज्य सरकार, इस मिशन के लिए 1 लाख करोड़ से ज्यादा आवंटित किए गए थे।

संचार रणनीति

जमीनी स्तर पर एसबीएम के तहत व्यवहार परिवर्तन संचार किया जाता है और राष्ट्रीय स्तर पर मास मीडिया सहायक की भूमिका निभा रहा है। उदाहरण के लिए, अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, भूमि पेडनेकर और अनुष्का अभिनीत दरवाजा बंद जैसे मास मीडिया अभियान, महिला सशक्तिकरण के संदेश, दो पिट वाले शौचालय और शौचालयों के उपयोग का प्रचार करना। जबकि एसबीएम के जमीनी सिपाही स्वच्छग्राही इंटर-पर्सनल कम्युनिकेशन के माध्यम से व्यवहार में बदलाव और बेहतर व्यवहार को बनाए रखने के लिए समुदायों को प्रेरित करने वाले कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।

खुले में शौच मुक्त के लिए पानी

खुले में शौच मुक्त बनाने गांवों के लिए पाइप वाली जल आपूर्ति (पीडब्ल्यूएस) के प्रावधान को प्राथमिकता देने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्ल्यूपी) के तहत एक नीतिगत निर्णय लिया गया है।

एसबीएम का असर

डब्ल्यूएचओ के हालिया अध्ययन में बताया गया है कि स्वच्छ भारत 2019 तक 300,000 लोगों की जान बचायेगा और इसके बाद भी 150,000 लोगों को सालाना बचाया जाएगा।