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केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री ने उच्च शिक्षण संस्थाओं को स्वच्छता पुरस्कार 2018 प्रदान किए

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने आज नई दिल्ली में  उच्च शिक्षण संस्थाओं को स्वच्छता पुरस्कार प्रदान किए। ये पुरस्कार 51 शिक्षण संस्थाओं को 8 विभिन्नि श्रेणियों में दिए गए।
श्री जावड़ेकर ने इस अवसर पर कहा कि स्वच्छ भारत ही स्वस्थ भारत की नींव बन सकता है। स्वच्छ भारत से ही स्वस्थ भारत मूर्त रूप ले सकता है। सरकार इसे संभव बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। छात्रों में स्वच्छता की आदत होनी चाहिए। ये आदत शिक्षा संस्थानों में ही विकसित की जा सकती है इसलिए उनका मंत्रालय इस दिशा में काम करने वाले शिक्षण संस्थानों को पुरस्कृत कर रहा है।

श्री जावड़ेकर ने महात्मा गांधी का स्मरण करते हुए कहा कि सही मायने में वही स्वच्छता के ब्रांड एम्बेसडर थे। उन्होंने लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक और शिक्षित करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी थी। देश को स्वच्छ रखना ही महात्मा गांधी को हमारी सच्ची श्रृद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि 4 साल के छोटे से समय में देश में 9 करोड़ शौचालय बनाना और 4.80 लाख गांवों को खुले में शौच से मुक्त करना स्वच्छ भारत अभियान की बड़ी उपलब्धि रही है।   
केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों और समाज को ठोस कचरा प्रबंधन ई-कचरा प्रबंधन और जल संरक्षण की तकनीक के प्रति जागरूक बनाना चाहिए ताकि वे देश में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को महत्व दे सकें।
श्री जावड़ेकर ने इस अवसर पर स्वच्छता और कचरा प्रबंधन पर दो पुस्तकें जारी कीं और साथ ही 60 उच्च शिक्षण संस्थाओं  तथा गांवों में स्वच्छता गतिविधियों पर एक पुस्तिका का विमोचन भी किया। केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डॉ. सत्य पाल सिंह ने कहा कि सही मायने स्वच्छता ही शिक्षा है जिसका हमें पालन करना चाहिए। उन्होंने बाहरी स्वच्छता के साथ ही अंतर्मन की स्वच्छता पर भी जोर दिया और कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य मानव का संपूर्ण विकास करना है।
पुरस्कार समारोह में उच्च शिक्षा सचिव श्री आर सुब्रह्मण्यम, विश्व विद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष और एआईसीटी के अध्यक्ष श्री अनिल सहस्रबुद्धे सहित कई अधिकारी भी उपस्थित थे।