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मंत्रिमंडल ने कृषि एवं सहायक क्षेत्रों में सहयोग के लिए भारत और उज्‍बेकिस्‍तान के बीच समझौता-ज्ञापन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल ने कृषि एवं सहायक क्षेत्रों में सहयोग के लिए भारत और उज्‍बेकिस्‍तान के बीच समझौता-ज्ञापन को मंजूरी दे दी।

भारत और उज्‍बेकिस्‍तान के बीच समझौते में निम्‍नलिखित क्षेत्रों में सहयोग किया जाएगा –
  1. पारस्‍परिक हित संबंधी कानूनों, मानकों और उत्‍पाद नमूनों का आदान-प्रदान,
  2. उज्‍बेकिस्‍तान में संयुक्‍त कृषि क्‍लस्‍टरों की स्‍थापना
  • फसल उत्‍पादन और उसकी विविधता के क्षेत्र में अनुभव का आदान-प्रदान
  1. आधुनिक प्रौद्योगिकी आधारित बीज उत्‍पादन में अनुभव का आदान-प्रदान, दोनों देशों में नियमों के अनुरूप बीजों के प्रमाणीकरण के सम्‍बन्‍ध में सूचनाओं का आदान-प्रदान, पारस्‍परिक हितों को ध्‍यान में रखते हुए बीजों के नमूनों का आदान-प्रदान
  2. कृषि सहायक क्षेत्रों में सिंचाई सहित सक्षम जल उपयोगिता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का इस्‍तेमाल
  3. जेनेटिक्‍स, प्रजनन, बायो-प्रौद्योगिकी, पादप सुरक्षा, मृदा उत्‍पादकता संरक्षण, मशीनीकरण, जल संसाधन में संयुक्‍त वैज्ञानिक अनुसंधान तथा वैज्ञानिक परिणामों का पारस्‍परिक उपयोग
  • पादप क्‍वारंटीन के क्षेत्र में सहयोग का विकास और विस्‍तार
  • पशु स्‍वास्‍थ्‍य, मुर्गी पालन, जेनोमिक्‍स और क्‍वारंटीन सुविधाओं सहित पशु पालन के क्षेत्र में अनुभव का आदान-प्रदान
  1. वैज्ञानिक एवं व्‍यावहारिक गतिविधियों (मेला, प्रदर्शनी, सम्‍मेलन, संगोष्‍ठी) पर कृषि तथा खाद्य उद्योग के क्षेत्र में अनुसंधान संस्‍थाओं के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान
  2. कृषि एवं खाद्य व्‍यापार में सहयोग
  3. खाद्य प्रसंस्‍करण संयुक्‍त उपक्रम स्‍थापित करने की संभावनओं की तलाश
  • दोनों पक्षाओं के बीच पारस्‍परिक रूप से स्‍वीकृत सहयोग के अन्‍य क्षेत्र।
    समझौते में संयुक्‍त कार्य समूह की स्‍थापना का प्रावधान है, जिसमें दोनों देशों के प्रतिनिधि होंगे। इसका कार्य सहयोग की योजना तैयार करना, समझौते के कार्यान्‍वयन के दौरान उभरने वाली समस्‍याओं को हल करना और पक्षों द्वारा निर्धारित कार्य के क्रियान्‍वयन की निगरानी करना होगा। कार्य समूह की बैठक हर दो वर्षों में होगी और यह बारी-बारी से भारत और उज्‍बेकिस्‍तान में आयोजित की जाएगी। यह समझौता हस्‍ताक्षर होने की तिथि से लागू होगा और पांच वर्षों की अवधि तक कार्यशील रहेगा। इसके बाद इसका नवीनीकरण स्‍वमेव पांच वर्षों के लिए हो जाएगा। दोनों पक्षों में से जो भी पक्ष उसे समाप्‍त करने की सूचना देगा, समझौता उसी तारीख से भंग माना जाएगा।