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गर्मी का मौसम और धुल का हमला

मवाना में गर्मी के साथ साथ मौसम में धुल का गुबार भी गहराने लगा है जिससे विसिब्लिटी के कम होने के साथ साथ सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है. धूल-मिट्टी का सेहत पर बुरा असर पड़ता है, जिससे कई तरह की बिमारियों और एलर्जी से सामना हो सकता है. साथ ही अगर इससे बचने का उपाय ना किये जाए तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते है. क्योंकि आने वाला मानसून स्थिति को और गंभीर बना सकता है जिससे और ज्यादा परेशानियाँ हो सकती है. 

बचने के लिए सबसे बेहतर तरीका यही है कि शरीर की प्रतिरोधी क्षमता बनी रहे और इसके साथ ही कुछ सावधानियां भी जरूरी है। मौसम के कारण धुल का शरीर पर प्रतिकूल असर पड़ता है जिससे त्वचा और साँस सम्बन्धी बीमारी होने की सम्भावना बढ़ जाती है जिनमे एलर्जिक राइनाइटिस, (नाक बहना, जुकाम), दमा, पित्ती (अर्टिकेरिया), दाद, फीवर, एडिमा बीमारी प्रमुख है. यदि इनमे से कोई समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क की सलाह दी जाती है.
वही मौसम की इस धुल के हमले का खात्मा केवल मानसूनी बारिश ही कर सकती है, जिसका सभी को बेसब्री से इंतजार है. वही मौसंम विभाग की माने तो बंगाल में मानसून की रफ़्तार पर ब्रेक लगने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मानसून के पहुचने में अभी समय लग सकता है. ऐसे में सभी को अहतियात बरतने की सलाह दी जाती है. घर बाहर निकलते समय पानी पी कर और मास्क लगा कर निकलें और आस पास सभी को ये सलाह दें.