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विश्व बैंक ने 6,000 करोड़ की अटल भूजल योजना को अनुमति प्रदान की

विश्व बैंक ने6000 करोड़ की लागत से जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय की केंद्रीय क्षेत्र योजना को अनुमति प्रदान की है । योजना को विश्व बैंक की सहायता से 2018-10 से 2022-23 की पांच वर्षीय कालावधि में कार्यान्वित किया जाना है । मंत्रालय की वित्त व्यय समिति पहले ही योजना के प्रस्ताव की अनुशंसा कर चुकी है एवं परियोजना के लिये मंत्रालय जल्द ही मंत्रिमण्डल की मंजूरी लेगा ।

देश के बड़े भाग में भूजल संसाधनों की गंभीर कमी दूर करने के लिये मंत्रालय ने अटल भूजल योजना का निर्माण किया है ।योजना का उद्देश्य देश के प्राथमिक क्षेत्रों में सामुदायिक भागीदारी से भूजल प्रबंधन की स्थिति में सुधार करना है । योजना के अंतर्गत पहचान किये गये प्राथमिक क्षेत्र गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश राज्यों में पड़ते हैं ।यह राज्य भारत में भूजल के मामले मेंअत्यधिक शोषित, संकटमय एवं अर्द्ध संकटमय खंडोंका लगभग 25% निरूपित करते हैं । यह राज्य भारत में पाये जाने वाले दो बड़े प्रकार के भूजल निकायों- जलोढ़ एवं हार्ड रॉक जलभृत को कवर करते हैं एवं भूजल प्रबंधन में सांस्थानिक तैयारी एवं अनुभव के मामले में यह आत्मनिर्भरहैं ।
योजना के अंतर्गत भूजल संचालन हेतु ज़िम्मेदार संस्थानों को बेहतर बनानेएवं भूजल प्रबंधन में पानी के प्रभावी उपयोग एवं संरक्षण को बढ़ावा देने वाला व्यवहारगत परिवर्तन लाने के लिये सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहन देने के लिये धनराशि प्रदान की जाएगी ।यह योजना पहचान किये गए प्राथमिक क्षेत्रों में योजनाओं के कार्यान्वयन को प्रोत्साहन देकर प्रदेशों में जारी मौजूदा सरकारी योजनाओं के सम्मिलन की सुविधा भी प्रदान करेगी ।योजना के क्रियान्वयन से इन प्रदेशों के 78 ज़िलों में लगभग 8350 ग्राम पंचायतों के लाभान्वित होने की आशा है । योजना के अंतर्गत धनराशि अनुदान के रूप में भागीदारी करने वाले प्रदेशों को उपलब्ध करा दी जाएगी ।

भूजल प्रबंधन में सक्रिय सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करना योजना के बड़े उद्देश्यों में शामिल है ।योजना के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों जैसे वॉटर यूज़र एसोसिएशन, भूजल के आंकड़ों की निगरानी एवं वितरण, जलसंबंधी आय-व्ययक, ग्राम पंचायतों के अनुरूप जल सुरक्षा योजनाओं की तैयारी व कार्यान्वयन एवं चिरस्थायी जल प्रबंधन से संबंधित आईईसी गतिविधियों में समुदायों की सक्रिय भागीदारी प्रस्तावित की गई है । सार्वजनिक वित्तपोषण की प्रभावोत्पादकता में सुधारके लिये एवं भागीदार राज्यों में भूजल पर विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों को व्यवस्थित करने के लिये नीचे से ऊपर भूजल योजना की प्रक्रिया में सामुदायिक भागीदारी से भी मदद मिलने की आशा है ।
योजना के कार्यान्वयन से अनेक सकारात्मक परिणाम मिलने की आशा है जैसे भूजल के बारे में बेहतर समझ, भूजल में गिरावट से संबंधित विषयों पर ठोस एवं समेकित समुदाय-आधारित रुख, नयी एवं पुरानी योजनाओं के सम्मिलन से संधारणीय भूजल प्रबंधन, पानी के उपयोग से जुड़ी प्रभावी प्रक्रियाओं को अपनाने से सिंचाई में लगने वाले भूजल के इस्तेमाल में कमी एवं लक्षित क्षेत्रों में भूजल संसाधनों में बढ़ोतरी ।