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दूरी 423 किलोमीटर से घटकर 12.7 किलोमीटर हो जाएगी

      भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्‍ल्‍यूएआई) असम सरकार के सहयोग से मजूली द्वीप के लिए रोल ऑन – रोल ऑफ (रो-रो) सुविधा शुरू करेगी। असम के मुख्‍यमंत्री श्री सर्वानंद सोनोवाल 11 अक्‍टूबर, 2018 को नई रो-रो सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इस रो-रो सुविधा के नदी मार्ग के इस्‍तेमाल से 423 किलोमीटर लंबे घुमावदार सड़क मार्ग की दूरी, घटकर केवल 12.7 किलोमीटर रह जाएगी। सड़क मार्ग के रास्‍ते ट्रकों को तेजपुर सड़क पुल के रास्‍ते नीमाती से मजूली द्वीप पहुंचना पड़ता है।

      आईडब्‍ल्‍यूएआई ने नई सेवा के लिए 9.46 करोड़ रुपये की लागत से एक नया जहाज एमवी भूपेन हजारिका खरीदा है और इसके लिए आवश्‍यक टर्मिनल प्रदान किया गया है। 46.5 मीटर लंबा,13.3 मीटर चौड़ा जहाज 8 ट्रक और 100 यात्रियों को ले जा सकता है। आईडब्‍ल्‍यूएआई ब्रह्मपुत्र नदी में इस्‍तेमाल के लिए कुछ और ऐसे रो-रो जहाज खरीदने की योजना बना रहा है।
      ब्रह्मपुत्र नदी स्थित मजूली द्वीप दुनिया के सबसे बड़े द्वीपों में से एक है और इसे संपर्क के मामले में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इसमें 144 गांव हैं जिनकी आबादी 1,50,000 से अधिक है। मजूली द्वीप के लिए रो-रो सेवा की शुरुआत न केवल असम बल्कि समूचे पूर्वोत्तर क्षेत्र का संपर्क बढ़ाने की दिशा में एक अनोखी घटना होगी। इस समय असम के दक्षिणी और उत्तरी भागों को जोड़ने के लिए ब्रह्मपुत्र नदी में जोगीघोपा, गुवाहाटी, तेजपुर और सादिया में चार सड़क पुल हैं। नदी के किसी भी तरफ रहने वाले लोगों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए विभिन्‍न स्‍थानों पर परम्‍परागत नौकाओं का इस्‍तेमाल करना पड़ता है। पर्याप्‍त संख्‍या में पुल, कार्गों और यात्रियों की आवाजाही के अभाव में लंबा रास्‍ता लेना पड़ता है जिससे समय और धन की बर्बादी होती है।
      इससे पहले आईडब्‍ल्‍यूएआई इसी तरह की रो-रो सेवा धुबरी और हतसिंगीमारी के बीच शुरू कर चुका है जिससे यात्रा की दूरी 190 किलोमीटर कम हो गई है। इसके लिए धुबरी में एक स्‍थायी रो-रो टर्मिनल का निर्माण किया गया है। ब्रह्मपुत्र नदी के 11 स्‍थानों पर तैरते हुए टर्मिनल बनाए गए हैं। ये हैं हतसिंगीमारी, धुबरी, जोगीघोपा, तेजपुर, सिलघाट, विश्‍वनाथ घाट, नीमाती, सेंगाजन, बोगीबील, डिब्रूगढ़/ओकलैंड और ओरिमघाट।

भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण मजूली द्वीप के लिए नई रो-रो सेवा शुरू करेगा

भारतीय वायु सेना के सेवानिवृत्‍त अधिकारी ने उस स्‍कूल को बतौर दान 17 लाख रुपये दिये जहां उनकी दिवंगत पत्‍नी ने 21 साल तक पढ़ाया था
विंग कमांडर (सेवानिवृत्‍त) जे पी बदुनी भारतीय वायु सेना के एक अनुभवी अधिकारी हैं। उनकी दिवंगत पत्‍नी श्रीमती विधु बदुनी वर्ष 1986 से अगले 21 वर्षों तक दिल्‍ली स्थित एयर फोर्स गोल्‍डन जुबली इंस्‍टीट्यूट में एक शिक्षिका थीं। दिल का दौरा पड़ने के कारण इसी वर्ष 6 फरवरी को उनका निधन हो गया। श्रीमती विधु बदुनी की याद में उनके पति विंग कमांडर (सेवानिवृत्‍त) जे पी बदुनी ने इस स्‍कूल को 17 लाख रुपये बतौर दान दिये हैं। इस स्‍कूल में एक समर्पित पीआरटी के रूप में विंग कमांडर (सेवानिवृत्‍त) जे पी बदुनी की पत्‍नी ने अपनी सेवाएं दी थीं।
इस स्‍कूल की प्रधानाध्‍यापि‍का श्रीमती पूनम एस रामपाल ने कहा, ‘इस दान राशि में से 10 लाख रुपये का उपयोग हर वर्ष शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिभाशाली उपलब्धि हासिल करने वाले कक्षा V से लेकर  कक्षाXI तक के विदयार्थियों को छात्रवृत्तियां देने और पुरस्‍कृत करने में किया जाएगा। वहीं, शेष राशि का इस्‍तेमाल इस स्‍कूल की प्राथमिक शिक्षा से जुड़ी बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के विकास में किया जाएगा।’

इससे पहले स्‍कूल के परिसर में आयोजित एक गमगीन समारोह, जहां चेक सौंपा गया, के दौरान विंग कमांडर (सेवानिवृत्‍त) बदुनी ने अपने विचार व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि वह उस संस्‍थान को धनराशि दान में देना चाहते हैं जहां उनकी प्रिय पत्‍नी ने अपनी सेवाएं दी थीं। दान की यह रकम उनकी दिवंगत पत्‍नी की उस बचत राशि में से दी गई है जिसे उन्‍होंने इस स्‍कूल में अपनी सेवाएं प्रदान करने के दौरान विगत वर्षों में इकट्ठी की थी। उन्‍होंने उम्‍मीद जताई कि यह उनकी दिवंगत पत्‍नी के लिए यथोचित श्रद्धांजलि होगी और इससे उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन के लिए कड़ी मेहनत करने वाले योग्‍य विद्यार्थियों को मदद मिलेगी।

भारतीय वायु सेना के सेवानिवृत्‍त अधिकारी ने 17 लाख रुपये दान दिये

भारत की एक्‍ट ईस्‍ट नीति के मद्देनजर वर्तमान में उत्‍तर-पश्‍चिम प्रशांत महासागर क्षेत्र में विशेष परिचालन के तहत तैनात किया गया आईएनएस राणा अब कोरिया गणराज्‍य के जेजू क्षेत्र में पहुंच गया है, जहां वह अंतरराष्‍ट्रीय बेड़ा समीक्षा (फ्लीट रिव्‍यू) में शिरकत करेगा। अंतरराष्‍ट्रीय बेड़ा समीक्षा का आयोजन 8 अक्‍टूबर से शुरू हुआ है जो 15 अक्‍टूबर, 2018 तक जारी रहेगा। अपनी सात दिवसीय यात्रा के दौरान कैप्‍टन अतुल देसवाल के नेतृत्‍व में आईएनएस राणा कोरिया की नौसेना के साथ-साथ आईएफआर में भाग ले रही अन्‍य विदेशी नौसेनाओं के साथ भी अनगिनत विश्‍वास संवर्धन अभ्‍यास कार्यक्रमों में भाग लेगा।

आईएनएस राणा नामक पोत अपनी यात्रा के दौरान आईएफआर से जुड़े अनेक कार्यक्रमों में बड़ी सक्रियता के साथ भाग लेगा। एक नौसना दल उद्घाटन समारोह का हिस्‍सा होगा। यह पोत खेलकूद से जुड़े विभिन्‍न कार्यक्रमों के साथ-साथ सांस्‍कृतिक आयोजनों का भी एक अहम हिस्‍सा होगा। आईएनएस राणा निर्धारत आईएफआर कार्यक्रम के अनुसार स्‍वागत समारोह की अगवानी करेगा।
भारत और कोरिया गणराज्‍य के बीच लम्‍बे समय से कायम ऐतिहासिक सांस्‍कृतिक संबंधों की बदौलत ही दोनों देशों के बीच जीवंत द्विपक्षीय संबंधों की मजबूत नींव पड़ी है। दोनों देशों के बीच बढ़ती आर्थिक सहभागिता और सैन्‍य संबंध भी पारस्‍परिक द्विपक्षीय रिश्‍तों में शामिल हैं।

आईएनएस राणा दक्षिण कोरिया में ‘आईएफआर’ में भाग लेगा

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने पर्यटन के क्षेत्र में भारत और रोमानिया के बीच समझौता ज्ञापन को पूर्व प्रभाव से अपनी मंजूरी दे दी है। सितंबर, 2018 में भारत के उपराष्ट्रपति की रोमानिया यात्रा के दौरान समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे।
समझौता ज्ञापन के प्रमुख उद्देश्य हैं-
ए) पर्यटन क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार।
बी) पर्यटन से संबंधित सूचना और डाटा का आदान-प्रदान। होटलों तथा टूर-ऑपरेटरों सहित सभी पर्यटन हितधारकों के बीच सहयोग को प्रोत्साहन देना।
सी) पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्रों में निवेश।
डी) टूर-ऑपरेटरों/मीडिया तथा दोतरफा पर्यटन को प्रोत्साहन देने के लिए जनमत बनाने वालों की एक-दूसरे देशों में यात्रा।
ई) प्रोत्साहन, विपणन, गंतव्य विकास और प्रबंधन के क्षेत्रों में अनुभवों का आदान-प्रदान।
एफ) दोनों देशों के आकर्षक पर्यटन स्थलों को प्रोत्साहन देने के लिए फिल्म पर्यटन के माध्यम से द्विपक्षीय सहयोग में तेजी लाना।
जी) सुरक्षित, सम्मानित और सतत पर्यटन को प्रोत्साहित करना
एच) दोनों देशों के बीच पर्यटकों के आवागमन में सहायता देना।
     
रोमानिया में भारत के लिए पर्यटन की आपार क्षमता है। बाजार है। (2017 में रोमानिया से लगभग 11844 पर्यटक भारत आए)। रोमानिया के साथ इस समझौता ज्ञापन से पर्यटकों के आगमन में वृद्धि होगी।

पृष्ठभूमिः
भारत और रोमानिया के बीच मजबूत कूटनीतिक और आर्थिक संबंध है। दोनों देश अपने संबंधों को और मजबूत तथा विकसित करना चाहते है। इसीलिए भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय और रोमानिया के पर्यटन विभाग ने पर्यटन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

पर्यटन के क्षेत्र में भारत और रोमानिया के बीच समझौता

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने तिरुपति (आंध्र प्रदेश) तथा बेरहामपुर (ओडिशा) में भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्‍थान (आईआईएसईआर) के नये परिसरों की स्‍थापना और संचालन को अपनी स्‍वीकृति दे दी है। इस पर 3074.12 करोड़ रुपये (गैर आवर्ती 2366.48 करोड़ रुपये तथा आवर्ती 707.64 करोड़ रुपये) की लागत आएगी।

मंत्रिमंडल ने  प्रत्‍येक आईआईएसईआर में सातवें सीपीसी के स्‍तर 14 में रजिस्‍ट्रार के दो पदों के सृजन के लिए अपनी मंजूरी दे दी है।
विवरण:
  • कुल 3074.12 करोड़ रुपये का लागत मूल्‍यांकन किया गया है। इसमें से निम्‍नलिखित विवरण के अनुसार इन संस्‍थानों के स्‍थायी परिसर के निर्माण पर 2366.48 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे :
संस्‍थानपूंजीआवर्तीकुल
आईआईएसईआर तिरुपति1137.16354.181491.34
आईआईएसईआर बेरहामपुर1229.32353.461582.78 
कुल2366.48707.643074.12
  • प्रत्‍येक आईआईएसईआर में 1855 विद्यार्थियों के लिए दोनों परिसर 1,17,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनाए जाएंगे जिसमें सभी आधारभूत सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
  • दोनों संस्‍थानों के स्‍थायी परिसरों का निर्माण दिसम्‍बर 2021 तक पूरा होगा।
लाभ:
      भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्‍थान (आईआईएसईआर) स्‍नातक और स्‍नातकोत्‍तर स्‍तरों पीएचडी और एकीकृत पीएचडी पाठ्यक्रम में उच्‍चस्‍तरीय विज्ञान शिक्षा प्रदान करेंगे। दोनों संस्‍थान विज्ञान के अग्रणी क्षेत्रों में शोध कार्य करेंगे। आईआईएसईआर श्रेष्‍ठ वैज्ञानिक प्रतिभा फैकल्‍टी के रूप में आकर्षित करके भारत को ज्ञान अर्थव्‍यवस्‍था की ओर ले जाने में सहायता करेंगे और भारत में वैज्ञानिक मानव शक्ति का मजबूत आधार तैयार करेंगे।
पृष्‍ठभूमि :
      आईआईएसईआर तिरुपति 2015 में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के अनुसार स्‍थापित किया गया जबकि आईआईएसईआर बेरहामपुर की स्‍थापना 2016 में हुई। केन्‍द्रीय वित्‍त मंत्री ने 2015 के अपने बजट भाषण में इसकी स्‍थापना की घोषणा की थी। दोनों संस्‍थान अभी अस्‍थायी परिसरों से काम कर रहे हैं।

तिरुपति और बेरहामपुर में भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्‍थान के स्‍थापना और संचालन को मंजूरी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने पर्यावरण योगदान के लिए भारत और फिनलैंड के बीच समझौता-ज्ञापन को मंजूरी दे दी है। इस समझौता-ज्ञापन से दोनों देशों के बीच समानता, आदान-प्रदान और पारस्परिक लाभ के आधार पर पर्यावरण सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए दीर्घकालीन सहयोग तथा नजदीकी प्रोत्साहन को बल मिलेगा। इसके मद्देनजर दोनों देशों में लागू कानून और कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखा जाएगा।

      समझौता ज्ञापन से आशा की जाती है कि इसके जरिए बेहतर पर्यावरण सुरक्षा, बेहतर संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के बेहतर प्रबंधन और वन्यजीव सुरक्षा/संरक्षण के क्षेत्र में आधुनिक प्रौद्योगिकियों एवं उत्कृष्ट व्यवहारों को प्राप्त किया जा सकेगा।
      समझौता ज्ञापन में सहयोग के निम्नलिखित क्षेत्र शामिल हैं-
i)     वायु और जल प्रदूषण रोकथाम और शुद्धिकरण, दूषित मिट्टी का उपचार
ii)    घातक कचरे को शामिल करते हुए कचरा प्रबंधन, और कचरे-से-बिजली प्रौद्योगिकियां
iii)    वृत्तीय अर्थव्यवस्था प्रोत्साहन, कम कार्बन वाले उपाय और वनों सहित प्राकृतिक संसाधनों का सतत् प्रबंधन
iv)    जलवायु परिवर्तन
v)    पर्यावरण और वन निगरानी तथा डाटा प्रबंधन
vi)    समुद्री और तटीय संसाधनों का संरक्षण
vii)   महासागरीय/समुद्री द्वीपों का समग्र प्रबंधन, तथा
viii)   आपस में तय किए जाने वाले अन्य क्षेत्र
पृष्ठभूमिः
      पर्यावरण की बढ़ती हुई समस्या सिर्फ किसी एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे पूरी दुनिया को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। भारत विस्तृत तटीय रेखा और समृद्ध जैव-विविधता से भरपूर विश्व की उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। फिनलैंड में वायु और जल प्रदूषण जैसी प्रमुख पर्यावरण समस्याएं हैं। इनके अलावा वहां वन्यजीव संरक्षण की भी समस्या है। फिनलैंड की प्रमुख पर्यावरण एजेंसी वहां का पर्यावरण मंत्रालय है, जिसकी स्थापना 1983 में हुई थी। वहां घरेलू और आसपास के देशों के उद्योगों से पैदा होने वाला प्रदूषण, वहां हवा और पानी की शुद्धता को प्रभावित कर रहा है। फिनलैंड को जल प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों की बढ़ती मांग जैसी चुनौतियों का भी सामना है। दोनों देशों को अशुद्ध जल प्रबंधन, लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण, वायु एवं जल प्रदूषण नियंत्रण तथा प्राकृतिक संसाधनों की बढ़ती मांग जैसी कई पर्यावरण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
      इस आपातस्थिति को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों ने तय किया है कि पर्यावरण की बढ़ती समस्याओं से निपटने के लिए आपस में मिलकर पर्यावरण सुरक्षा तथा प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के क्षेत्र में नजदीकी और दीर्घकालिक सहयोग किया जाए। इसके अलावा बेहतर पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में आधुनिक प्रौद्योगिकियों तथा उत्कृष्ट व्यवहारों को अपनाया जाए।

पर्यावरण योगदान के लिए भारत और फिनलैंड के बीच समझौता

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने बाइको लॉरी लिमिटेड (बीएलएल) को बंद करने की मंजूरी दे दी है। इस प्रक्रिया में कंपनी के कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति योजना (वीआरएस)/ स्वैच्छिक वियोजन योजना (वीएसएस) शामिल है।
सरकार के विस्तृत दिशा-निर्देशों के अनुरूप समस्त देनदारियों के निष्पादन के बाद बीएलएल की निष्क्रिय परिसंपत्तियों का उत्पादक उपयोग किया जाएगा।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कंपनी को दोबारा चालू करने के लिए समय-समय पर विभिन्न कदम उठाए। बहरहाल, कंपनी को दोबारा चालू नहीं किया जा सका। इसके अलावा भारी पूंजी आवश्यकता तथा प्रतिस्पर्धी व्यापारिक माहौल के मद्देनजर कंपनी को दोबारा चालू करने की कोई संभावना नजर नहीं आती। कंपनी को लगातार घाटा होता रहा, जिसके कारण उसे आगे चलाना नुकसानदेह हो गया था। इसके अतिरिक्त अनिश्चित भविष्य के कारण अधिकारियों और कर्मचारियों में निराशा पैदा हो रही थी।
पृष्ठभूमिः
बीएलएल अनुसूची सी केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (सीपीएसई) है। इसमें तेल उद्योग विकास बोर्ड की इक्विटी 67.33 प्रतिशत और भारत सरकार की इक्विटी 32.33 प्रतिशत है। शेष 0.44 प्रतिशत हिस्सा अन्य के पास है। कंपनी का पंजीकृत कार्यालय और मुख्यालय कोलकाता, पश्चिम बंगाल में है और इसके चार व्यापारिक प्रखंड हैं: स्विचगेयर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिकल रिपेयर,  प्रोजेक्ट्स डिविजन और ल्यूब ब्लेंडिंग एवं फिलिंग फेसिलिटी।
कंपनी लगातार वित्तीय दबाव में थी और कामकाज संबंधी समस्याओं से भी जूझ रही थी। पिछले कई वर्षों से कंपनी को घाटा हो रहा था। बीएलएल का संचित घाटा उसकी इक्विटी से अधिक हो गया था और शुद्ध संपत्ति ऋणात्मक हो गई थी। वित्त वर्ष 2017-18 के अंत तक कंपनी की शुद्ध संपत्ति (-) 78.88 करोड़ रुपये और 31 मार्च, 2018 को उसका संचित घाटा (-) 153.95 करोड़ रुपये था।

मंत्रिमंडल ने बाइको लॉरी लिमिटेड को बंद करने की मंजूरी दी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए सभी पात्र अराजपत्रित रेल कर्मचारियों (आरपीएफ/आरपीएसएफ कर्मियों को छोड़कर) को 78 दिन के वेतन के बराबर उत्पादकता से जुड़ा बोनस (पीएलबी) के भुगतान को अपनी स्वीकृति दे दी है। रेल कर्मचारियों के 78 दिनों के पीएलबी भुगतान पर 2044.31 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पात्र अराजपत्रित रेल कर्मचारियों को पीएलबी भुगतान के लिए वेतन गणना सीमा 7000 रुपये प्रति माह निर्धारित है। 78 दिनों के लिए प्रत्येक पात्र रेल कर्मचारी को 17,951 रुपये का अधिकतम भुगतान देय होगा। इस निर्णय से लगभग 11.91 लाख अराजपत्रित रेल कर्मचारियों को लाभ मिलेगा।

रेलवे का उत्पादकता से जुड़ा बोनस पूरे देश के सभी अराजपत्रित रेल कर्मचारी (आरपीएफ/आरपीएसएफ कर्मियों को छोड़कर) को कवर करता है। पात्र रेल कर्मचारियों को पीएलबी का भुगतान प्रत्येक वर्ष दशहरा/पूजा अवकाशों से पहले किया जाता है। मंत्रिमंडल के निर्णय को इस वर्ष के लिए भी अवकाशों से पहले लागू किया जाएग। वर्ष 2017-18 के लिए 78 दिनों के वेतन के बराबर उत्पादकता से जुड़ा बोनस दिए जाने से रेलवे का कामकाज सुधारने में कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा।
पृष्ठभूमिः
रेलवे भारत सरकार का पहला प्रतिष्ठान है जहां 1971-80 में उत्पादकता से जुड़ा बोनस देना प्रारंभ किया गया था। उस समय विचार का प्रमुख विषय यह था कि अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन में ढांचागत समर्थन देने में रेलवे की भूमिका महत्वपूर्ण है। रेलवे के सम्पूर्ण कामकाज को ध्यान में रखते हुए बोनस भुगतान अधिनियम, 1965 के अनुरूप बोनस की धारणा के स्थान पर उत्पादकता से जुड़ा बोनस भुगतान को वांछित समझा गया।

मंत्रिमडल ने रेल कर्मचारियों के लिए उत्पादकता से जुड़े बोनस की स्वीकृति दी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने कौशल विकास के मद्देनजर मौजूदा नियामक संस्थानों राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीटी) और राष्ट्रीय कौशल विकास एजेंसी (एनएसडीए) को मिलाकर राष्ट्रीय व्यावसायी शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) की स्थापना को मंजूरी दे दी है।

विवरणः
एनसीवीईटी दीर्घकालीन और अल्पकालीन दोनों तरह के व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण के काम में लगे निकायों के कामकाज को नियमित करेगा तथा इन निकायों के कामकाज के लिए न्यूनतम मानक तैयार करेगा। एनसीवीईटी के प्रमुख कामकाज में निम्नलिखित क्षेत्र शामिल हैं-
  • निर्णायक निकायों, मूल्यांकन निकायों और कौशल संबंधी सूचना प्रदाताओं की मान्यता तथा नियमन
  • निर्णायक निकायों और क्षेत्र कौशल परिषदों (एसएससी) द्वारा विकसित पात्रताओं की मंजूरी
  • निर्णायक निकायों और मूल्यांकन एजेंसियों के जरिए व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों का अप्रत्यक्ष नियमन
  • अनुसंधान एवं सूचना प्रसार
  • शिकायत निवारण
परिषद का नेतृत्व एक अध्यक्ष के हाथ में होगा तथा उसमें कार्यकारी और गैर-कार्यकारी सदस्य होंगे। चूंकि एनसीवीईटी को दो मौजूदा निकायों को आपस में मिलाकर स्थापित करने का प्रस्ताव है, इसलिए मौजूदा अवरचना तथा संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा आसान कामकाज के लिए अन्य पद भी बनाए जाएंगे। नियामक निकाय, नियमन प्रक्रियाओं के उत्कृष्ट व्यवहारों का पालन करेगा, जिससे उसका कामकाज और संचालन प्रोफेशनल तरीके से तथा मौजूदा कानूनों के तहत सुनिश्चित किया जा सकेगा।
लाभः
इस संस्थागत सुधार से गुणवत्ता दुरुस्त होगी, कौशल विकास कार्यक्रमों की बाजार प्रासंगिकता बढ़ेगी, जिसके मद्देनजर व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण की साख में इजाफा होगा। इसके अलावा कौशल क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और कर्मचारियों की भागीदारी बढ़ेगी। यह संभव हो जाने से व्यावसायिक शिक्षा के मूल्यों और कुशल श्रमशक्ति को बढ़ाने संबंधी दोहरे उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। इसके कारण भारत को विश्व की कौशल राजधानी बनाने के विषय में प्रधानमंत्री के एजेंडा को बल मिलेगा।
एनसीवीईटी भारत की कौशल ईको-प्रणाली की एक नियामक संस्था है, जिसका देश में व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण में संलग्न सभी व्यक्तियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। कौशल आधारित शिक्षा के विचार को आकांक्षी आचरण के रूप में देखा जाएगा, जिससे छात्रों को कौशल आधारित शैक्षिक पाठ्यक्रमों में हिस्सा लेने का प्रोत्साहन मिलेगा। आशा की जाती है कि इस उपाय से उद्योग और सेवा क्षेत्र में कुशल श्रमशक्ति की स्थिर आपूर्ति के जरिए व्यापार सुगमता की सुविधा हो जाएगी।
पृष्ठभूमिः
भारत की जनसांख्यिकीय विशेषता के उपयोग संबंधी प्रयासों को ध्यान में रखते हुए उसकी श्रमशक्ति के लिए आवश्यक हो गया है कि उसे रोजगार प्राप्त करने के योग्य कौशलों एवं ज्ञान से लैस किया जाए, ताकि वह ठोस तरीके से आर्थिक विकास में योगदान कर सके। अतीत में देश की कौशल प्रशिक्षण आवश्यकताओं को औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों द्वारा चलाए जाने वाले पाठ्यक्रमों के जरिए पूरा किया जाता था। इसके अलावा इस आवश्यकता को एनसीवीटी द्वारा नियमित प्रमापीय नियोजन योजना (एमईएस) के जरिए पूरा किया जाता था, क्योंकि यह व्यवस्था देश की बढ़ती कौशल जरूरतों को पूरा करने में पर्याप्त नहीं थी और श्रमशक्ति की कौशल आवश्यकताएं भी बढ़ रही थीं, इसलिए सरकार ने कौशल प्रयासों को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए थे। इन प्रयासों के नतीजे में प्रशिक्षण अवरचना का बहुत विकास हुआ, जिनमें से अधिकतर निजी क्षेत्र में थीं। इस समय कौशल विकास कार्यक्रमों को लागू करने के लिए 20 मंत्रालय/विभाग मौजूद हैं, जिनमें से अधिकतर निजी क्षेत्र प्रशिक्षण प्रदाताओं की सहायता से चल रहे हैं।
बहरहाल, समुचित नियामक दृष्टि के अभाव में बहुत सारे हितधारक विभिन्न मानकों वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों की पेशकश करते रहे हैं। इन हितधारकों की मूल्यांकन और प्रमाणीकरण प्रणालियां भिन्न-भिन्न हैं, जिसका व्यावसायिक शिक्षा प्रणाली पर गंभीर असर पड़ता है। इस तरह देश के युवाओं की रोजगार योग्यता पर भी असर पड़ता है। वर्ष 2013 में राष्ट्रीय कौशल विकास एजेंसी (एनएसडीए) की स्थापना के जरिए नियमन उपाय की कोशिश की गई थी, ताकि सरकार और निजी क्षेत्र के कौशल विकास प्रयासों में समन्वय बनाया जा सके। एनएसडीए की प्रमुख भूमिका राष्ट्रीय कौशल पात्रता संरचना को संचालित करने की थी, ताकि क्षेत्रवार आवश्यकताओं के लिए गुणवत्ता तथा मानकों को सुनिश्चित किया जा सके।
बहरहाल, एक समेकित नियामक प्राधिकार की आवश्यकता महसूस की गई जो अल्पकालीन और दीर्घकालीन कौशल आधारित प्रशिक्षण के सभी पक्षों को पूरा कर सके। एनसीवीईटी को एक ऐसे संस्थान के रूप में प्रस्तुत किया गया जो वे सभी नियामक कार्य करेगा, जिन्हें एनसीवीटी तथा एनएसडीए करते रहे हैं। इस समय क्षेत्र कौशल परिषदों के जरिए नियामक कामकाज राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) द्वारा किया जा रहा है। यह भी एनसीवीईटी में निहित होगा।

राष्ट्रीय व्यावसायी शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) की स्थापना को मंजूरी

भारत 20 से 24 फरवरी 2019 तक येलाहांका, बेंगलुरू (कर्नाटक) स्थित एयर फोर्स स्‍टेशन में ‘‘एरो इंडिया 2019’’ के 12वें संस्‍करण की मेजबानी करेगा।
 पांच दिन के शो के दौरान एरो स्‍पेस और रक्षा उद्योग से जुड़ी एक विशाल व्‍यापार प्रदर्शनी के साथ सार्वजनिक एयर शो आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा दुनिया भर के एरो स्‍पेस उद्योग से जुड़े उद्योगपति और बड़े निवेशक भी इसमें भाग लेंगे। एरो इंडिया विमानन उद्योग और इसके विस्‍तार से संबंधित जानकारी के आदान-प्रदान का अनोखा अवसर प्रदान करेगा। घरेलू विमानन उद्योग के अलावा इससे मेक इन इंडिया को भी बढ़ावा मिलेगा।

एरो इंडिया में भारत और विदेश की 500 कंपनियों के भाग लेने की उम्‍मीद है।
प्रदर्शनी में भाग लेने वालों और आगंतुकों के पंजीकरण के लिए तैयार एक नई वेबसाइट एरो इंडिया 2019 (https://aeroindia.gov.in) की आज शुरुआत की गई।
      इस पोर्टल से ऑनलाइन पंजीकरण शुल्‍क के भुगतान और प्रदर्शनी स्‍थल पर अपनी पसंद का स्‍थान/स्‍टॉल बुक करने की सुविधा मिलेगी। बिजनेस के उद्देश्‍य से आने वाले लोग आवश्‍यक शुल्‍क का ऑनलाइन भुगतान करने पर टिकट खरीद सकेंगे।
यह वेबसाइट इस तरीके से बनाई गई है जहां भारतीय कंपनियां क्रेडिट कार्ड/डेबिट कार्ड/ नेट बैंकिंग/यूपीआई/एनईएफटी/आरटीजीएस का इस्‍तेमाल करते हुए भारतीय रुपये में और विदेशी कंपनियां क्रेडिट कार्ड/डेबिट कार्ड का इस्‍तेमाल कर अमेरिकी डॉलर में भुगतान कर सकेंगी। मीडिया के प्रतिनिधियों के लिए पंजीकरण जल्‍दी ही शुरू होगा।
वेबसाइट में एरो इंडिया 2019 शो के दौरान होने वाले सेमिनारों, सीईओ के बीच विचार-विमर्श के बारे में नवीनतम जानकारी मिल सकेगी।

एरो इंडिया 2019 वेबसाइट शुरू

महिला और बाल विकास मंत्रालय ने पोषण माह के दौरान सभी स्‍तरों पर और मंत्रालयों/विभागों में अच्‍छे कार्य करने वालों की पहचान की और पोषण माह पुरस्‍कार समारोह आयोजित कर अनुकरणीय कार्य करने वालों को आज नई दिल्‍ली में सम्‍मानित किया। पुरस्‍कार समारोह में नीति आयोग के उपाध्‍यक्ष डॉ. राजीव कुमार, नीति आयोग के सदस्‍य डॉ. विनोद के. पॉल, महिला और बाल विकास मंत्रालय में सचिव श्री राकेश श्रीवास्‍तव तथा विभिन्‍न मंत्रालयों के अनेक अन्‍य उच्‍च अधिकारी शामिल हुए।
      पोषण माह के बारे में जानकारी देते हुए श्री श्रीवास्‍तव ने बताया कि सितम्‍बर के महीने में आयोजित पोषण माह में कुल भागीदारी 25.4 करोड़ रही और देश भर में 22.58 लाख गतिविधियां आयोजित की गईं। इसमें मध्‍य प्रदेश शीर्ष पर रहा जहां 7.7 गतिविधियां आयोजित की गईं। इसके बाद आंध्र प्रदेश, गुजरात, बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्‍ट्र का स्‍थान रहा। उन्‍होंने बताया कि 22.58 लाख गतिविधियों में से 32 प्रतिशत का आयोजन संयुक्‍त रूप से क्षेत्र अधिकारियों ने किया, करीब 21 प्रतिशत अंतर-मंत्रालयी गतिविधियां थीं।

      मुख्‍य भाषण में नीति आयोग के उपाध्‍यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि किसी भी ऐसे देश के लिए जिसे ज्ञान वाली अर्थव्‍यवस्‍था के लिए जाना जाता है, यह स्‍वीकार्य नहीं है कि उसके 38 प्रतिशत बच्‍चे अल्‍प पोषण का शिकार हों अत: देश को कुपोषण मुक्‍त करना सर्वोच्‍च प्राथमिकता है। उन्‍होंने कहा कि पोषण अभियान अथवा राष्‍ट्रीय पोषण मिशन समाभिरूपता का उत्‍कृष्‍ट उदाहरण है। महिला और बाल विकास मंत्रालय की उपलब्‍धि‍ की सराहना करते हुए उन्‍होंने कहा कि पोषण की पहल को एक महीने में 25 करोड़ लोगों के बीच ले जाना सभी मंत्रालयों और साझेदारों के साथ कार्य करने के संबंध में नीति आयोग की अन्‍य परियोजनाओं के लिए एक उदाहरण प्रस्‍तुत करता है।
      इस अवसर पर सदस्‍य (स्‍वास्‍थ्‍य और पोषण) डॉ. विनोद के. पॉल ने कहा कि पोषण अभियान का विचार प्रधानमंत्री के नेतृत्‍व और देश के लिए उनकी दूरदर्शिता के लिए एक भेंट है।
      इस अवसर पर देश भर के क्षेत्र स्‍तर के अधिकारियों और संस्‍थानों को एक पदक और प्रशस्ति पत्र सहित 206 से अधिक पुरस्‍कार प्रदान किए गए।

महिला और बाल विकास मंत्रालय ने पोषण माह पुरस्‍कार समारोह में अनुकरणीय कार्य के लिए सम्‍मानित किया

        ओडिशा के राज्यपाल प्रोफेसर गणेशी लाल ने आज ओडिशा के बारगढ़ जिले की भाटली तहसील के बोलासिंघा गांव में भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन द्वारा स्थापित किये जा रहे सेकेंड जेनरेशन (2 जी) इथेनॉल बायो-रिफाइनरी की नींव रखी। केन्द्रीय पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस, कौशलविकास और उद्यमिता मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान और कई गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे। स्थापित किया जाने वाला यह बॉयो-रिफाइनरी संयंत्र देश का अपने किस्म का पहला संयंत्र है जो चावल की भूसी का फीडस्टॉक के रूप में उपयोग करके प्रति वर्ष 3 करोड़ लीटर एथनॉल उत्पादन करेगा। इस संयंत्र द्वारा उत्पादित किये गये एथनॉल को पेट्रोल के साथ मिश्रित किया जाएगा। इस परियोजना की लागत लगभग 100 करोड़ रुपये है।

        बढ़ती हुई ऊर्जा सुरक्षा जरूरतों और पर्यावरण की चिंताओं के कारण बॉयोफ्यूल का महत्व बढ़ा है। 
अनेक देशों ने अपनी घरेलू जरूरतों के अनुसार बॉयोफ्यूल के उत्पादन और उपयोग को प्रोत्साहन देने के 
लिए विभिन्न प्रक्रियाएं और प्रोत्साहन लागू किये हैं। भारत में प्रतिवर्ष लगभग 120-160 एमएमटी फालतू
 बॉयोमास की उपलब्धता है। जिसके परिवर्तित होने पर 3 हजार करोड़ लीटर एथनॉल के उत्पादन की 
क्षमता स्थापित हो जाएगी। भारत की राष्ट्रीय बॉयोफ्यूल नीति 2018 में वर्ष 2030 तक पेट्रोल में 20 
प्रतिशत एथनॉल के मिश्रण का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि एथनॉल उपलब्ध न होने के कारण अभी 
पेट्रोल में केवल 3 से 4 प्रतिशत एथनॉल का मिश्रण किया जा रहा है। 2जी एथनॉल संयंत्रों की स्थापना 
से पेट्रोल में एथनॉल का मिश्रण करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। बारगढ़ बायो-रिफाइनरी
 सालाना दो लाख टन चावल की भूसी का फीडस्टॉक के रूप में उपयोग करेगी। जिसकी आपूर्ति भाटी 
अंबाभोना, सोहेला, बुर्ला, लाखनपुर आदि जैसे आसपास के स्थानों से की जाएगी। 
        बायो-रिफाइनरिया एथनॉल उत्पादन के लिए चावल की भूसी का उपयोग करके पर्यावरण को 
साफ रखने में मदद करेगी और बेकार भूसी को खेतों में नहीं जलाना पड़ेगा। पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण
 से जीवाश्म ईंधन की तुलना में ग्रीन हाउस गैसों का कम उत्सर्जन होगा। इस संयंत्र से वातावरण को 
साफ रखने के अलावा चावल की भूसी बायो-रिफाइनरी को बेचने से किसानों की अतिरिक्त आमदनी बढ़ने
 के कारण उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थितियों को सुधारने में मदद मिलेगी। इसके अलावा इस 
संयंत्र के निर्माण परिचालन और बायोमास के आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन से लगभग 1200 लोगों को सीधे 
और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार जुटाने में मदद मिलेगी। इस क्षेत्र में बुनियादी ढ़ांचे के विकास और इस 

क्षेत्र के लोगों की आजीविका में सुधार को बढ़ावा मिलेगा तथा एथनॉल के मिश्रण से देश का तेल निर्यात
 घटने और विदेशी मुद्रा की बचत से देश की आत्मनिर्भता में बढ़ोत्तरी होगी।

ओडिशा के राज्यपाल ने बारगढ़ में 2 जी एथेनॉल बायो-रिफाइनरी की नींव रखी

केंद्रीय संसदीय मामले और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्‍वयन मंत्री श्री विजय गोयल ने केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्रालय द्वारा विकसित ‘ऑनलाइन आश्‍वासन निगरानी प्रणाली (ओएमएएस)’ का शुभारंभ किया। इस प्रणाली से संसद के दोनों सदनों के पटल पर दिये जाने वाले आश्‍वासनों से संबंधित सूचनाएं अब कागज रहित (पेपरलेस) हो गई हैं। दूसरे शब्‍दों में, इस तरह की सूचनाएं अब डिजिटल प्रारूप में उपलब्‍ध हो गई हैं।
विभिन्‍न मंत्री महोदय संसद में पूछे जाने वाले प्रश्‍नों का उत्‍तर अथवा कोई बयान देते समय सदन के पटल पर तरह-तरह के आश्‍वासन भी देते हैं। संसदीय मामलों का मंत्रालय इस उद्देश्‍य के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों को ध्‍यान में रखते हुए सदन की कार्यवाहियों से इस तरह के आश्‍वासनों को अलग छांट लेता है और इन आश्‍वासनों के अंश को सं‍बंधित मंत्रालयों को भेज देता है, ताकि उन्‍हें पूरा किया जा सके।

‘ओएएमएस’ का उद्घाटन हो जाने से अब ई-ऑफिस के जरिए संसदीय मामलों के मंत्रालय द्वारा छांटे गए सभी आश्‍वासन इस प्रणाली या सिस्‍टम पर नजर आएंगे और विभिन्‍न मंत्रालय/ विभाग, लोकसभा सचिवालय एवं राज्‍यसभा सचिवालय समस्‍त उद्देश्‍यों को ध्‍यान में रखते हुए इस सिस्‍टम के जरिए इन्‍हें संप्रेषित करेंगे। इसमें संसदीय आश्‍वासनों से संबंधित विभिन्‍न कार्यकलाप शामिल होंगे जिनमें कार्यान्‍वयन रिपोर्ट भेजना, वापस लेने का अनुरोध करना विस्‍तार करने के लिए अनुरोध करना और संबंधित निर्णय शामिल हैं। इसके बाद से अब किसी भी तरह के कागजी संदेश को स्‍वीकार नहीं किया जाएगा।
मानवीय ढिलाई और दिशा-निर्देशों का अनुपालन न करने के कारण आश्‍वासनों को पूरा करने की प्रक्रिया में कई तरह की समस्‍याएं उभर कर सामने आती हैं जिससे यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत कम पारदर्शी हो जाती है। लोकसभा, राज्‍यसभा और संसदीय मामलों के मंत्रालय में विभिन्‍न माड्यूल को उपयोग में लाया जा रहा है जिससे संबंधित आंकड़ों में सही ढंग से मिलान नहीं हो पाता है। यही कारण है कि लंबित आश्‍वासनों की वास्‍तविक स्थिति पर करीबी नजर रखने और उन्‍हें त्‍वरित ढंग से पूरा करने के उद्देश्‍य से एक ऑनलाइन आश्‍वासन
निगरानी प्रणाली की स्‍थापना की जरूरत महसूस हुई।
विभिन्‍न मंत्रालयों/विभागों के अधिकारियों और राज्‍य सभा सचिवालय एवं लोकसभा सचिवालय के अधिकारियों से प्राप्‍त सुझावों को ध्‍यान में रखते हुए उपर्युक्‍त सॉफ्टवेयर को संसदीय मामलों के मंत्रालय द्वारा विकसित किया गया है। इस संदर्भ में मौजूदा दिशा-निर्देशों और प्रचलित तौर-तरीकों को भी ध्‍यान में रखा गया। मंत्रालय ने क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी चलाया जिसके तहत 24 अप्रैल, 2018 से लेकर 1 मई, 2018 तक की अवधि के दौरान विभिन्‍न मंत्रालयों/विभागों के 84 प्रमुख (नोडल) अधिकारियों को इस सॉफ्टवेयर के परिचालन से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान इन प्रमुख अधिकारियों को आईडी और पासवर्ड दिये गये थे।
वर्ष 2007 से लेकर अब तक संसद के दोनों सदनों के पटल पर विभिन्‍न मंत्रियों द्वारा दिये गये कुल मिलाकर 26,830 आश्‍वासनों को संसदीय मामलों के मंत्रालय द्वारा छांटा गया है जिनमें से 21,439 आश्‍वासन पूरे किये गये हैं, जबकि 1,903 आश्‍वासनों को वापस ले लिया गया है। इस तरह कुल मिलाकर 3,488 आश्‍वासन अब भी अनुपालन के लिए लंबित हैं। विभिन्‍न आंकड़ों सहित ओएएमएस से संबंधित सूचनाएं वेब पोर्टल  oams.nic.in पर उपलब्‍ध हैं।
ओएएमएस के शुभारंभ के दौरान संसदीय मामलों के सचिव श्री एस एन त्रिपाठी, संसदीय मामलों के मंत्रालय के अन्‍य अधिकारी, राज्‍य सभा सचिवालय, लोकसभा सचिवालय और भारत सरकार के विभिन्‍न मंत्रालयों/विभागों के अधिकारीगण भी इस अवसर पर उपस्थित थे।  

श्री विजय गोयल ने ‘ऑनलाइन आश्‍वासन निगरानी प्रणाली’ का शुभारंभ किया

गृह मंत्रालय ने प्रवासी कानून, 1946 के अनुसार असम में रह रहे गोरखा समुदाय के सदस्‍यों की नागरिकता की स्थिति के बारे में राज्‍य सरकार को स्‍पष्‍टीकरण जारी किया है। हाल ही में ऑल असम गोरखा स्‍टू‍डेंट्स यूनियन ने गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह को एक ज्ञापन दिया था क्‍योंकि असम में रह रहे गोरखा समुदाय के सदस्‍यों के कुछ मामले प्रवासी न्‍यायाधिकरण के पास भेज दिए गए थे।

असम सरकार को भेजी गई जानकारी में गृह मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों के मामले में गोरखाओं के सामने उत्‍पन्‍न कठिनाइयों को दूर करने के विभिन्‍न प्रावधानों की एक सूची दी है। 24 सितम्‍बर, 2018 को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि गोरखा समुदाय के जो सदस्‍य संविधान बनने के समय भारतीय नागरिक थे, अथवा जो जन्‍म से भारतीय नागरिक हैं, जिन्‍होंने पंजीकरण अथवा नागरिकता कानून, 1955 के प्रावधानों के अनुसार नागरिकता हासिल की है प्रवासी कानून, 1946 के अनुच्‍छेद 2 (ए) तथा प्रवासी कानून 1939 के पंजीकरण के विषय में ‘‘विदेशी’’ नहीं हैं अत: ऐसे मामलों को प्रवासी न्‍यायाधिकरण के पास नहीं भेजा जाएगा।
इसमें जोर देकर कहा कि गया है कि गोरखा समुदाय का कोई भी सदस्‍य जिसके पास नेपाली नागरिकता है और जो नेपाल सीमा पर जमीन अथवा वायु के रास्‍ते पासपोर्ट अथवा वीजा के बिना भारत पहुंच चुका है और कितने भी लंबे समय से भारत में रह रहा है उसे अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा यदि उसके पास पहचान का कोई दस्‍तावेज जैसे नेपाली पासपोर्ट, नेपाली प्रमाणपत्र, नेपाल के चुनाव आयोग द्वारा जारी वोटर आईडी, भारत में नेपाली दूतावास द्वारा जारी सीमित वैधता फोटो पहचान प्रमाणपत्र है। इसमें 10-18 वर्ष के आयु वर्ग के ऐसे बच्‍चे भी शामिल हैं जिनके पास स्‍कूल के प्रधानाचार्य द्वारा जारी फोटो आईडी है और जो वैध यात्रा दस्‍तावेजों के साथ यात्रा करने वाले अपने माता-पिता के साथ हैं। 10 वर्ष से कम आयु के बच्‍चों के लिए ऐसे किसी दस्‍तावेज की आवश्‍यकता नहीं है।

गृह मंत्रालय का असम के गोरखाओं की भारतीय नागरिकता की स्थिति के बारे में स्‍पष्‍टीकरण जारी

केन्‍द्रीय इस्‍पात मंत्री चौधरी बीरेन्‍दर सिंह ने आज भिलाई इस्‍पात संयंत्र दुर्घटना में घायल लोगों की स्थिति और उनके इलाज के बारे में अस्‍पताल जाकर पूछताछ की। श्री चौधरी ने घायलों के परिवार के सदस्‍यों से बातचीत की। उन्‍होंने दुर्घटना में मारे गए प्रत्‍येक मृतक के परिवारजनों को 30-30 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को 15-15 लाख रुपये तथा मामूली रूप से घायल लोगों को दो-दो लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की।

इस्‍पात मंत्री ने घोषणा की कि मृतकों के परिवारों को मुआवजे के अलावा कंपनी द्वारा 33 लाख रुपये से लेकर 90 लाख रुपये तक समस्‍त वेतन और अन्‍य भत्ते मिलेंगे। श्री चौधरी ने भारतीय इस्‍पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) को निर्देश दिया कि दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिवारों के लिए रोजगार और बच्‍चों के लिए स्‍नातक स्‍तर तक मुफ्त शिक्षा की व्‍यवस्‍था करे।
जलने से घायल दो और कर्मचारियों के दम तोड़ देने के साथ ही मृतकों की संख्‍या 11 हो गई है। 10 घायलों का भिलाई इस्‍पात संयंत्र अस्‍पताल में इलाज चल रहा है और दो व्‍यक्तियों को गंभीर अवस्‍था में आईसीयू में भर्ती कराया गया है।
एम्‍स, दिल्‍ली के बर्न्‍स विभाग के प्रमुख डॉ. मनीष सिंघल ने भिलाई इस्‍पात संयंत्र अस्‍पताल जाकर घायलों के इलाज पर संतोष व्‍यक्‍त किया।
इस्‍पात मंत्रालय विशेषज्ञों की एक बाहरी समिति स्‍थापित करने की प्रक्रिया में है और इस बारे में जल्‍दी ही आदेश जारी कर दिया जाएगा।
इस्‍पात मंत्री ने अस्‍पताल का दौरा करने के बाद सेल के अधिकारियों के साथ बैठक की और निर्देश दिया कि इस दुर्घटना में मारे गए कर्मचारियों और घायलों के परिवारों के पुनर्वास तथा सभी भुगतान तेजी से सुनिश्चित करने की जिम्‍मेदारी संयंत्र के एक वरिष्‍ठ अधिकारी को सौंप दी जाए।
संयंत्र के दो वरिष्‍ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है और संयंत्र के सीईओ को इस दुर्घटना के बाद ड्यूटी से वंचित कर दिया गया है।

भिलाई इस्‍पात संयंत्र दुर्घटना के मृतकों के परिवारों को 30-30 लाख रुपये मुआवजा

      कर निर्धारण वर्ष 2018-19 के लिए आयकर रिटर्न और ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की अंतिम तिथि करदाताओं की कुछ विशेष श्रेणियों के लिए 30 सितम्‍बर थी। के‍न्‍द्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने इससे पहले आयकर रिटर्न और विभिन्‍न ऑडिट रिपोर्ट (जिन्‍हें निर्धारित तिथि तक दाखिल करने की जरूरत थी) दाखिल करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 15 अक्‍टूबर, 2018 कर दी थी। विभिन्‍न हितधारकों की ओर से मिले ज्ञापनों पर विचार करते हुए सीबीडीटी ने करदाताओं की उपर्युक्‍त विशेष श्रेणियों के लिए आयकर रिटर्न के साथ-साथ ऑडिट रिपोर्टों को दाखिल करने की अंतिम तिथि 15 अक्‍टूबर, 2018 से बढ़ाकर 31 अक्‍टूबर, 2018 कर दी है। हालांकि, जैसा कि 24 सितम्‍बर 2018 के पूर्ववर्ती आदेश में निर्दिष्‍ट किया गया है, बढ़ी हुई अंतिम तिथि तक अपने आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले करदाताओं को आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 234ए के प्रावधानों के अनुसार ब्‍याज अदा करना होगा।

सीबीडीटी ने आयकर रिटर्न और ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अक्‍टूबर तक बढ़ाई

राजस्थान के जयपुर में जीका वायरस बीमारी के कुछ मामले सामने आए हैं। आईसीएमआर की निगरानी प्रणाली के माध्यम से जयपुर में इस बीमारी के प्रकोप की जानकारी मिली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी.नड्डा के निर्देश के अनुसार पहले मामले की जानकारी मिलने के तुरंत बाद 7 सदस्यों की उच्चस्तरीय केंद्रीय टीम बीमारी को नियंत्रित करने में राज्य सरकार की सहायता के लिए जयपुर रवाना की गई।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के स्तर पर स्थिति की समीक्षा की जा रही है और स्वास्थ्य सचिव द्वारा निगरानी की जा रही है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) के नेतृत्व में तकनीकी विशेषज्ञों के एक उच्चस्तरीय संयुक्त निगरानी समूह की दो बार बैठक हुई है। 05 अक्टूबर, 2018 से उच्चस्तरीय केंद्रीय टीम बीमारी नियंत्रण और निगरानी के लिए जयपुर में है। राष्ट्रीय बीमारी नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) में नियंत्रण कक्ष कार्य कर रहा है ताकि स्थिति पर नियमित रूप से नजर रखी जा सके।

चिन्हित क्षेत्र में सभी संदिग्ध मामलों तथा मच्छरों के नमूनो की जांच की जा रही है। वायरल शोध तथा निदान प्रयोगशालाओं को जांच के अतिरिक्त किट प्रदान किए जा रहे हैं। राज्य सरकार को जीका वायरस बीमारी और रोकथाम के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए आईईसी सामग्री भेजी गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के माध्यम से क्षेत्र की सभी गर्भवती माताओं की निगरानी की जा रही है। राज्य सरकार क्षेत्र में व्यापक निगरानी तथा मच्छर नियंत्रण के उपाय कर रही है।

जीका वायरस बीमारी नई बीमारी है और विश्व के 86 देशों में यह बीमारी पाई गयी है। जीका वायरस बीमारी के लक्षण डेंगू जैसे वायरल संक्रमण की तरह है। बीमारी के लक्षणों में बुखार आना, त्वचा पर लाल चकत्ते उभरना, आंख में जलन होना, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, बैचेनी और सिरदर्द शामिल हैं।

भारत में पहली बार यह बीमारी जनवरी/फरवरी, 2017 में अहमदाबाद में फैली और दूसरी बार 2017 में यह बीमारी तमिलनाडु के कृष्णागिरी जिले में पाई गई। दोनों ही मामलों में सघन निगरानी और मच्छर प्रबंधन के जरिए सफलतापूर्वक काबू पा लिया गया।

यह बीमारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निगरानी रडार पर है। यद्यपि 18 नवबंर, 2016 से विश्व स्वास्थ्य संगठन की अधिसूचना के अनुसार यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिन्ता की स्थिति नहीं है।

स्थिति पर नियमित रूप से निगरानी रखी जा रही है।  

राजस्थान में जीका वायरस बीमारी की निगरानी

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती समारोह के अवसर पर यह मिशन कार्यान्वयन के अपने पांचवें और अंतिम वर्ष में पहुंच गया है। एसबीएम जमीनी स्तर पर सूचना, शिक्षा एवं संचार का उपयोग करके विशाल जन आंदोलन में बदल गया है जिससे यह एक व्यवहार परिवर्तन का अभियान बन गया है।

भारत के लिए स्वच्छता कार्यक्रम कोई नई घटना नहीं है, यह कार्यक्रम 1981 से चलाया जा रहा है।

हालांकि, कुछ रिपोर्ट ने गलत दावों के साथ एसबीएम के जमीनी स्तर पर प्रगति के दावों को कमजोर किया है। इस संबंध में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय निम्नलिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करता है।

प्रगति

पिछले 4 वर्षों में एसबीएम में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के व्यक्तिगत नेतृत्व के तहत बड़े स्तर पर व्यवहार परिवर्तन अभियान और जमीनी स्तर पर लोगों के अभियान के नेतृत्व में जबर्दस्त प्रगति देखी गई है।

इस कार्यक्रम की शुरुआत के बाद, भारत का ग्रामीण स्वच्छता कवरेज अक्टूबर 2014 के 39 प्रतिशत से बढ़कर आज 95 प्रतिशत हो गया है। इस मिशन के तहत लगभग 8.7 करोड़ घरेलू शौचालयों का निर्माण किया गया है। जिसका परिणाम, 25 राज्य/संघ शासित प्रदेशों, 529 जिले और 5,09,067 गांवों ने खुद को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया है।

इस साल के शुरू में, विश्व बैंक समर्थन परियोजना के तहत आयोजित राष्ट्रीय वार्षिक ग्रामीण स्वच्छता सर्वेक्षण (एनएआरएसएस) में पाया गया कि ग्रामीण भारत के घरों में 93.4 प्रतिशत लोगों द्वारा शौचालय का इस्तेमाल करते हैं और इससे पता चलता है कि जमीनी स्तर पर बदलाव हो रहा है। इस सर्वेक्षण में भारत के राज्य/केन्द्रशासित प्रदेशों के 6136 गांवों के 92040 परिवारों को शामिल किया गया था।

स्वच्छ भारत मिशन दुनिया का सबसे बड़ा सार्वजनिक वित्त पोषित स्वच्छता कार्यक्रम है। केन्द्र और राज्य सरकार, इस मिशन के लिए 1 लाख करोड़ से ज्यादा आवंटित किए गए थे।

संचार रणनीति

जमीनी स्तर पर एसबीएम के तहत व्यवहार परिवर्तन संचार किया जाता है और राष्ट्रीय स्तर पर मास मीडिया सहायक की भूमिका निभा रहा है। उदाहरण के लिए, अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, भूमि पेडनेकर और अनुष्का अभिनीत दरवाजा बंद जैसे मास मीडिया अभियान, महिला सशक्तिकरण के संदेश, दो पिट वाले शौचालय और शौचालयों के उपयोग का प्रचार करना। जबकि एसबीएम के जमीनी सिपाही स्वच्छग्राही इंटर-पर्सनल कम्युनिकेशन के माध्यम से व्यवहार में बदलाव और बेहतर व्यवहार को बनाए रखने के लिए समुदायों को प्रेरित करने वाले कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।

खुले में शौच मुक्त के लिए पानी

खुले में शौच मुक्त बनाने गांवों के लिए पाइप वाली जल आपूर्ति (पीडब्ल्यूएस) के प्रावधान को प्राथमिकता देने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्ल्यूपी) के तहत एक नीतिगत निर्णय लिया गया है।

एसबीएम का असर

डब्ल्यूएचओ के हालिया अध्ययन में बताया गया है कि स्वच्छ भारत 2019 तक 300,000 लोगों की जान बचायेगा और इसके बाद भी 150,000 लोगों को सालाना बचाया जाएगा।   

स्वच्छ भारत मिशन में शानदार कामयाबी के सटीक दावे

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज द्रुत कार्य बल- आरएएफ- का 26वां जयंती समारोह मनाया गया। इस अवसर पर एक आकर्षक परेड का भी आयोजन किया गया। केंद्रीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए और परेड की सलामी ली। उन्होने परंपरागत ढंग से परेड का निरीक्षण भी किया।

श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल- सीआरपीएफ़- ने देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होने कहा कि सीआरपीएफ़ ने जहां एक ओर कश्मीर में आतंकवाद को नियंत्रित किया है, वहीं पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद को समाप्त करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। जो उग्रवाद कभी 126 जिलों में फैला था वह आज 10-12 जिलों तक सिमट कर रह गया है। गृहमंत्री ने कहा कि इसका श्रेय सीआरपीएफ़ को जाता है।
उन्होने कहा कि कश्मीर के लोग भारत के अपने ही लोग हैं इसलिए सीआरपीएफ़ को उनके बीच बहुत ही सूझबूझ के साथ काम करना होता है। लेकिन जब आतंकवाद की बात आती है, सीआरपीएफ़ उसका कड़ा जवाब देती है। उन्होने कहा कि यह सीआरपीएफ़ की साख का सबूत है कि राज्यों द्वारा उसकी निरंतर मांग की जाती है। आरएएफ के जवानों की प्रशंसा करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि दंगा नियंत्रण जैसे मोर्चे पर इन्होने महत्वपूर्ण काम किया है। उन्होने कहा कि सीआरपीएफ़ राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय बैठा कर काम करती है। उन्होने कहा कि 2018 में सीआरपीएफ़ ने 131 नक्सलियों को मार गिराया और 1278 को जिंदा पकड़ लिया। 58 नक्सली आत्मसमर्पण के लिए मजबूर हुए।
सीआरपीएफ़ के सामाजिक पक्ष की प्रशंसा करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि शांति और विकास के लिए इसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सीआरपीएफ़ ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास के लिए भी काम किया है। सीआरपीएफ़ ने 52 गांव को गोद लिया है। इन गांवों में सीआरपीएफ़ के जवान लोगों को पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता जैसे मुद्दे पर जागरूक करते हैं। सीआरपीएफ़ ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ ही प्लास्टिक के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई है। गृहमंत्री ने कहा कि जवानों की शहादत पर अब उनके परिजनों को कम से कम 1 करोड़ रुपया देने का प्रावधान किया गया है।
श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार बल के अधिकारियों और जवानों के कल्याण के लिए भी कई महत्वपूर्ण योजनाएं चला रही है। जवानों के लिए आवासीय मकान बनाए जा रहे हैं और उनके बच्चों की पढ़ाई और शादी आदि के लिए वित्तीय मदद मुहैया कराई जा रही है। सीआरपीएफ़ के महानिदेशक श्री राजीव राय भटनागर ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया।     
कार्यक्रम में 15 अधिकारियों और जवानों को वीरता पदक से सम्मानित किया गया। जबकि दो अधिकारियों को सराहनीय सेवा पदक मिला। जिन अधिकारियों और जवानों को वीरता पदक से नवाजा गया उनके नाम हैं कमांडेंट किशोर कुमार, हवलदार अरुण कुमार, सिपाही मनीष कुमार यादव, सिपाही प्रदीप कुमार सिंह और सिपाही पठारे स्वप्निल हेमराज़। इन्हें कश्मीर में अवन्तिपुरा में आतंकवादियों के खिलाफ सफल कार्रवाई के लिए सम्मानित किया गया। कश्मीर में सुंबल में सीआरपीएफ़ कैंप पर फिदायीन आतंकी हमले के दौरान वीरता प्रदर्शित करने के लिए सहायक कमांडेंट शंकर लाल जाट और पंकज हल्लू, हवलदार पंकज कुमार तथा सिपाही राम दुलारे और बलराम टूरु को सम्मानित किया गया। कश्मीर में कुपवाड़ा में आतंकवादियों के खिलाफ अभूतपूर्व शौर्य प्रदर्शन के लिए निरीक्षक सुब्रमण्यम जी तथा सिपाही मोहम्मद अशरफ और मंधीर सिंह को तथा अनंतनाग में बैंक हमले में आतंकवादियों को मारने वाले हवलदार कौशल कुमार को तथा बिज बेहरा अनंतनाग में बीएसएफ़ के काफिले पर आतंकी हमले के दौरान शौर्य प्रदर्शन करने वाले सहायक उपनिरीक्षक नंद किशोर को सम्मानित किया गया। सराहनीय सेवाओं के लिए आरएएफ के डीआईजी दिलीप कुमार और संजय कुमार को सम्मानित किया गया।     
इस अवसर पर आरएएफ के जवानों ने कई हैरतअंगेज कारनामे भी पेश किए। आरएएफ के विशेष वाहनों की भी परेड कराई गई।
गौरतलब है की दंगे और दंगे जैसी स्थिति को नियंत्रित करने, कानून व्यवस्था से जुड़ी गंभीर समस्याओं के समाधान, भीड़ नियंत्रण और राहत तथा बचाव जैसे कार्यों को अंजाम देने के मकसद से 7 अक्टूबर 1992 को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 10 बटालियनों को द्रुत कार्य बल –आरएएफ- की स्थापना की गई थी। बाद में जनवरी 2018 में इसमें 5 और बटालियनें जोड़ी गईं। दिल्ली में मुख्यालय के साथ ही आरएएफ की 15 बटालियनें देश के विभिन्न हिस्सों में फैली हैं।
आपातकाल जैसी स्थिति में जनता के बीच कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास पैदा करने के उद्देश्य से आरएएफ काम करता है। देश के अलावा आरएएफ संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। आरएएफ ने हैती, कोसोवों और लाइबेरिया में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में योगदान दिया है। पहली बार 7 अक्टूबर 2003 को आरएएफ को राष्ट्रपति ने निशान से सम्मानित किया। 2017 को रजत जयंती समारोह के अवसर पर आरएएफ पर डाक विभाग द्वारा टिकट जारी किया गया।

विषम परिस्थियों में भी खरा उतरा है सीआरपीएफ़ और आरएएफ बल”: श्री राजनाथ सिंह

जापान का सामुद्रिक स्व-रक्षाबल (जेएमएसडीएफ) जहाज कागा, एक इज्यूमो क्लास हेलीकॉप्टर डिस्ट्रॉयर तथा इनाजुमा – एक गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर 07 अक्तूबर, 2018 को विशाखापत्तनम पहुंचे। रियर एडमिरल तत्सुया फुकादा, कमांडर, एस्कॉर्ट फ्लोटिला – 4 (सीसीएफ-4) 07 से 15 अक्तूबर, 2018 तक भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के जहाजों के साथ जापान-भारत सामुद्रिक अभ्यास (जेआईएमईएक्स) के तीसरे संस्करण में भाग लेंगे। (जेआईएमईएक्स18) का लक्ष्य अंतः सक्रियता बढ़ाना, आपसी समझ को बेहतर करना तथा एक-दूसरे के सर्वश्रेष्ठ प्रचलनों को अपनाना है।

भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्व स्वदेशी रूप से डिजाइन तथा निर्मित जंगी जहाजों एवं एक फ्लीट टैंकर द्वारा किया जाएगा। जो जहाज इसमें भाग ले रहे हैं, उनमें आईएनएस सतपुरा, मल्टीपर्पस स्टील्थ फ्रिगेट, आईएनएस केडमेट, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर कॉरवेट, मिसाइल कॉरवेट एवं आईएनएस शक्ति, फ्लीट टैंकर शामिल है।
(जेआईएमईएक्स18) आठ दिनों तक चलेगा जिसमें चार-चार दिनों के हार्बर एवं समुद्री चरण शामिल होंगे। जेआईएमईएक्स का पिछला संस्करण चेन्नई में दिसंबर, 2013 में आयोजित किया गया था।

जापान और भारत के बीच द्विपक्षीय सामुद्रिक अभ्यास विशाखापत्तनम में शुरू होगा