हमारे देश भारत में महात्मा बुद्ध, गुरू नानक साहब, भगवान महावीर, संत सिरोमणि रविदास, राजा राम मोहन राय, सांई बाबा, मेसोपोटेमिया और अरब के सूखे रेगिस्तानों में से यदि मूसा ईसा और रसूल जैसे अमृत निर्झर पैदा न होते तो वहां की तपते हुए बालुका में झुलसने कौन जाता। यूरोप के रणक्षेत्र में यदि हमें सुकरात, प्लेटो, अरस्तू और संत फ्रांसिस जैसे महान् आत्माओं ने जन्म न लिया होता तो वहां कौन जाता। ये ऐसे महान महापुरूष, साधु संत हुए हैं जिन्होंने सारा जीवन मानव कल्याण के लिये समर्पित कर दिया। उन्होंने यह दिखा दिया कि धरती पर रहने वाले प्रत्येक मनुष्य में एक ही आत्मा है, एक ही रसूख है। सबका एक ही ईश्वर, अल्लाह, गाॅड, मसीह है। इन सबने सारे संसार को एक ही तराजू में तोला है। राजा राम मोहन राय ने देश में चली आ रही कुप्रथा सती को समाप्त किया। बाबा साहब डाॅ. भीमराव अम्बेडकर ने महिलाओं को पढ़ने का अधिकार दिया। उन्हें मनुष्य जाति के साथ-साथ कंधे से कंधा मिलाकर हर क्षेत्र में बराबर का हक प्रदान किया। 
जी, हां हम बात कर रहे हैं उस महान पुरूष की जो आज पूरे विश्व में अपना परचम लहराये हुए है। इस महापुरूष ने अपना पूरा जीवन गरीबों के साथ-साथ उस जन के लिये समर्पित कर दिया जो सदियों से चली आ रही कुप्रथा का शिकार था। स्त्रियों की मानवीय दशा को उबार पाने के लिये हमारे भारतीय संविधान में विशेष प्रावधान किये हैं। जिस कारण आज महिला वर्ग एक नये मुकाम पर खड़ा है। ऐसा जब है कि प्रत्येक परिवार मां, बहन, बेटी, बहु होती है। यानी धरती पर ऐसा कोई परिवार नहीं है। जहां हम सब न हो। परंतु कुछ हमारे बीच रहने वाले आज ऐसे लोग मिल ही जायेंगे जो आज भी महिलाओं का तिरस्कार करते हैं। आज भी उन्हें खिलौना समझते हैं। जरा सोचिये यदि हमारे संविधान में यह बातें नहीं लिखी होती तो स्त्री वर्ग की क्या दुरदशा होती। हजारों सालों से घोर अन्याय को झेलते हुए स्त्री वर्ग को आज समानता के साथ जीने, पढ़ने-लिखने व रहने का मौलिक अधिकार बाबा साहब अम्बेडकर ने दिया है।  
आप सोच सकते हैं। उस महापुरूष ने कितना बलिदान दिया होगा जब दबे, कुचले गरीब वर्ग को पढ़ने का अधिकार भी नहीं और यहां तक कि कुए पर उसे पानी का भी अधिकार नहीं था। उस महामानव को सत्-सत् नमन्। देश पर कभी मुगलों का सम्राज्य रहा तो दो सौ सालों तक अंगे्रजों का सम्राज्य रहा। हमारे देश के शहीदों ने अपनी जान पर खेलकर देश को आजाद दिलाई। अंगे्रजों से तो हमें मुक्ति काफी संघर्ष करने के पश्चात मिल गयी। परंतु अब हमारे पास अपना देश चलाने के लिये कोई रूपरेखा चाहिए थी। परंतु उस जमाने में अपने आपको महापंडित बताने वाले लोग बहुतों ने जन्म तो लिया था परंतु करोंड़ों की आबादी वाले देश में कोई ऐसा शख्स नहीं था जो देश चलाने के लिये उनके पास कोई प्रारूप या रूपरेखा थी और न ही उसे कोई बनाने में सक्षम था। परंतु हमस ब यह बात भलीभांति जानते हैं कि जब-जब धरती पर गरीबों के साथ अत्याचार बढ़े हैं तब-तब किसी न किसी रूप ने गाॅड ने जन्म लिया है और वह थे बाबा साहेब डाक्टर भीमराव अम्बेडकर जिन्होंने कड़ी मेहनत दिन-रात एक करके दो साल ग्यारह माह अटठारह दिन में अपने देश का संविधान बनाया। जिस पर चलकर हमारा देश आज अपने पैरों पर खड़ा है। 
यहां एक बात बहुत ही सोचनीय है कि एक आम इंसान अपने परिवार के पालन पोषण में अपना सारा जीवन व्यतीत कर देता है। परंतु उस महामानव के बारे में भी जरा सोचकर देखों ऐसे समय में जब गरीबों को पढ़ने तक का अधिकार नहीं था तो आम बात छोड़िए। वह कैसा समय होगा। परंतु बाबा साहब ने अपने पढ़ाई के साथ समाज के हर वर्ग को साथ लेकर उनके उत्थान के बारे में सोचा करते थे। जीवन परंत तक उन्होंने संघर्ष ही किया। उस समय उन्होंने चैदह भाषाओं में पढ़ाई की और हमारा देश आज अपने पैरों पर खड़ा है। उस महामानव ने संविधान भी ऐसा बनाया कि जिसकी तारीफ पूरी दुनिया करती है। परंतु आज ऐसा समय आ गया है कि हम अपने परिवार तक ही सीमित रह गये हैं। जो लोग अपना परिवार तक नहीं संभाल पाते आज वह देश को संभालने की बात करते हैं। बाबा साहब ने एक बात कही थी ‘‘संविधान चाहे कितना अच्छा क्यों न हो जब तक उसे चलाने वाले ठीक नहीं होंगे तो वह संविधान भी खराब साबित होगा। परंतु चाहे संविधान कितना खराब हो तो चलाने वाले यदि ठीक होंगे तो वह ठीक होगा। जो लोग आज अनाप-सनाप बातें बोलते हैं वे अपने गिरेबां में झांककर देखें कि वह अपने परिवार को संभाल नहीं पाये तो देश कैसे संभालेंगे। आज हम सब पढ़ें हुए अपने समाज को कहते हैं क्या ऐसा है पढ़े-लिखे लोगों का समाज जिसमें ऐसी घिनौनी करतूत होती हो कि आज बच्चियां भी सुरक्षित नहीं हैं। आज टीवी चैनलों, अखबारों में शायद ही कोई ऐसा दिन जाता होगा जब हमें सैंकड़ों की तादात में ऐसी खबर पढ़ने को न मिले कि अमूक की आबरू तार-तार कर दी। क्या यही है हमारा समाज। हमें पढ़ाई के साथ-साथ अपने को चेंजिंग भी लानी होगी। बदलना होगा समाज को। क्या ऐसे ही एक अबला के मान को तार-तार किया जायेगा। हम बात करते हैं अरब में सख्त कानून है वहां अपराधियों को सरेराह फांसी पर चढ़ा दिया जाता है। उनकी हम तारीफ करते हैं। परंतु यह क्यों नहीं सोचते कि हमारा संविधान है ऐसा जिसकी तारीफ पूरी दुनिया करती है। उसे जरूरत है आज की ठीक से फोलो करने की न कि बदलने की। आज हमें अपनी सोच बदलनी ही होगी। वरना सोच को समय अपने आप बदल देता है। हमें अपने अधिकारों के प्रति लड़ना होगा। आप जानते ही हैं कि जब तक एक बच्चा रोता नहीं है तो मां भी दूध नहीं पिलाती है तो यहां बात है अपने अधिकारों की। आज हमें जरूरत है जागने की। यदि अब नहीं जागे तो बहुत देर हो जायेगी। 
- सुदेश वर्मा, वरिष्ठ पत्रकार, सुभारती मीडिया लिमिटेड, मेरठ। 
(ये लेखक के अपने निजि विचार हैं)
क्या आप जानते हैं बॉडी पाट्र्स आते कहाँ से है
कैसे जरूरत के हिसाब से अंगदान नही होता] अब आप 40 लाख देकर किडनी बदलवा देते हो] अब पैसे दिए हो तो 16 से 25 आयु के आसपास की मजबूत किडनी ही लगाएगा डाक्टर...। आखिर बॉडी पाट्र्स कहाँ से आते है... मुर्दाघरो में पड़ी लाशो से या एक्सीडेंट में मरने वालो से... ये पर्याप्त नही होती और 16 से 25 के लड़के ज्यादातर नशा करके अपने ज्यादातर पार्ट खराब कर चुके होते हैं...। एक जगह है...!! और वो है... हमारे देष भारत में मध्यम दर्जे के परिवार की लड़कियां...!!! ये लड़कियां सिगरेट] गुटखा या शराब का सेवन नहीं करती और शरीर को सुसज्जित रखती हैं। इनके दाँत] हड्डी] आँते] चमडा़] क्रेनियम] लीवर] किडनी] हृदय सब सही और ट्रांसप्लांट के लिए परफेक्ट होता है। इन लडकियों में ^लवबग* औऱ नोकरी का झांसा डालकर इनको कहीं भी ले जाना आसान होता है...। लावबग का मतलब है दिमाग मे प्रेम-प्यार का कीड़ा या नोकरी दिलाने के लिए। इसीलिए दिसम्बर महीने में ही अधिकांष लव प्रोमोटिंग फिल्मे आती हैं। दिसम्बर में फ़िल्मी हीरोटाइप राज] करन] राहुल] टाइप जैसे आशिक घूमना शुरू करते हैं...औऱ नोकरी देने के लिए दोस्त] रिष्तेदार या फ़र्ज़ी  कंपनी के ये बंदे कोई लवर या अपने रिष्तेदार नही बल्कि प्रोफेशनल क्रिमिनल होते हैं। ये पैसे के लिए कुछ भी कर सकते है। हर साल फरवरी के अंत तक मध्यम दर्जे के परिवार की 2 से 4 लाख लडकियां घर से गायब हो जाती हैं। ऐसा सरकारी आंकड़ों से एक रिपोर्ट के माध्यम से खुलाषा हुआ है। जो हमारे समाज के लिए एक बड़ा ही सोचनीय प्रष्न है। 
ऐसा मानना है कि आशिकी में घर से भाग गयी युवती पर ना तो कोई केस बनता है और न ही ऐसे मामलों में उन्हें खोजने की कोई कोषिष ही करता है और अंत में उनका एक बाल तक नही मिलता...जरा सोचिये, ये लड़किया कहाँ पहुँच जाती है? यह हमारे समाज को झकझोर कर देने वाला वाक्य है। अब ऐसे में क्या कोई अभिभावक अपने बच्चों को साथ चैबीसों घंटे तो रह नहीं सकता। क्योंकि उसे अपने परिवार का लालन-पालन भी करना होता है या यूं कह सकते हैं कि हमारे बच्चे अपने घरों से दूर पढ़ाई-लिखाई करने जाते हैं। जो सालों तक हास्टलों में रहकर अपनी पढ़ाई करते हैं। रही बात ऐसे परिवारों की जिनकी बेटियां सिर्फ चारदीवारी में दम घुटने को मजबूर हैं। ऐसे समय में अब मध्यम दर्जे के परिवार की बच्चियां क्या करेंगी। आप अच्छी तरह समझ सकते हो] जैसे ही कोई लवेरिया पकड़ा जाता है] नेता और मिडिया इसमें फुदकना शुरू कर देते है जाति धर्म के नाम पर तरह-तरह की बातें करते हैं। और आखिर में वह परिवार या पलायन कर देता है या फिर परिवार सहित मौत को गले लगा लेते हैं। असल में पहले तो इन बच्चियों का भरपूर शारीरिक शोषण किया जाता है उसके पश्चात हत्या कर दी जाती है और अंग व्यापार से इनकी कमाई होती है। अभी आप गूगल पर सर्च करके अंगो के भाव देखिएगा तो आप भी अष्चर्यचकित हो जायेंगे। फिर अंग प्रत्यारोपण का खर्च देखें तो आप की जुबां दबी की दबी रह जायेगी। क्योंकि एक गरीब परिवार के बसकी उस खर्चे को वहन कर पाना चने चबाना जैसा है। अगर एक लडकी की बॉडी को ढंग से खोले, और प्रत्यारोपण योग्य अंगों की सही कीमत लगे तो कम से कम 5 करोड़ आराम से मिल जाता है ऐसा अनुमान है। 
इसीलिए लव और मानव तस्करी पर ना तो कभी कोई कानून बनता है] और ना ही कोई बनने देता है। क्योंकि ऐसे भेड़िए आपको मिल ही जायेंगे जो इस घिनौने कार्य को अंजाम देते हैं। 
एक बहुत बड़ी बात तो यह कि कभी भी किसी नेता या बिजनेसमेन की बेटी घर से नही भागती और न ही गायब होती है। हमेशा वही लडकिया गायब होती हैं] जिनके परिवार की कोई राजनितिक या क़ानूनी पकड़ नही होती। ऐसा परिवार जो अपने पालन-पोषण में लगे रहते हैं। ऐसे परिवार सरकारी सहायता का सहारा ही एक आसरा है और काफी हद तक यह सहारा ही उनके लिए वरदान साबित होता है। ऐसा एक आंकड़े के अनुसार 2015 में 4000 लडकिया गायब हुई थी] वही 2017 से 2018 तक 7000 लड़कियां गायब हुई थी औऱ ये घटनायें अधिकतर लखनऊ] दिल्ली] मुम्बई जैसे बड़े शहरो में अधिक पाई गई हैं। माना कि हमारी लाड़ली बहिन बेटियां सब जानती हैं] लेकिन क्रिमिनल मार्केटिंग और अंग प्रत्यारोपण के लिए सही और असली अंग आते कहाँ से हैं... ये नही जानती। हम सबको अपनी बहिन बेटियों का ध्यान दें] क्योंकि] जो बाहर हो रहा है] वो हमारे घर में कभी भी हो सकता है औऱ लोगो की सही सलाह ले। किसी के झांसे में न आये।

बहुत पुरानी बात है। हमारे देश में एक बादशाह हुए हैं जिनका नाम था कुतुबुद्दीन ऐबक। जिन्होंने दिल्ली में स्थित कुतुब मिनार बनाई थी। उन्हीं के समय की एक कहानी है। राजा कुतुबुद्दीन ऐबक एक मुगल बादशाह थे। वह अपने राजपाठ को केवल राजकोष से ही चलाते थे। परंतु अपने परिवार का लालन-पालन अपने हाथ से लिखी हुई कुरान की कमाई से ही करते थे। एक बार राजा कई महीनों तक बीमार पड़ गये। उस समय उन्होंने कोई किताब नहीं लिखी। जिससे उनके पास रहने वाले एक नौकर की तनखा तीन-चार महीनों की हो गई। उसी दौरान उस नौकर के घर से खत आया कि आपकी माता जी बीमार हैं उन्होंने आपको बुलाया है। परंतु नौकर की तनखा नहीं मिली थी। इस कारण से वह अपने घर महीनों से नहीं गया था। अब नौकर के सामने बड़ी मुसीबत थी। इधर उसका राजा बीमार और उधर उसकी मां बीमार अब वह करे तो क्या करे। अंत में वह राजा के पास गया और बोला राजा साहब मुझे अपने घर जाना है क्योंकि मेरी माता जी बहुत बीमार हैं घर से खत आया है। मेरी तनखा दे दीजिए। राजा नौकर की बात सुनकर बहुत दुखी हुए। परंतु कुछ कह न सके। अंत में वह उठे और घर के अंदर जाकर रखे दो रूपये उसे लाकर दे दिये। नौकर ने वह पैसे चुपचाप अपने पास रख लिये। अब नौकर सोचने लगा कि राजा के पास इतनी धन दौलत है फिर भी इन्होंने मुझे मेरी सारी तनखा नहीं दी। वह सोच में पड़ गया। परंतु उसे नहीं पता था कि राजा अपनी हाथ से कुरान लिखते थे और उन्हें बाजार में बेचा जाता था उससे मिलने वाले धन से वह अपना परिवार चलाते थे। नौकर दो रू0 लेकर अपने घर को चल दिया।
नौकर को चलते-चलते दिन ढलता चला गया। जैसे ही वह दूसरे नगर में पहुंचा तो वहां एक आदमी अपने सिर पर टोकरा रखकर उसमें अनार आवाज लगाकर बेच रहा था। एक पैसे के दो अनार ले लो। अब नौकर को जैसे ही उसकी आवाज सुनाई दी उसने अनार वाले को अपने पास बुलाया। वह समझ गया था कि हमारे नगर में अनार नहीं मिलते हैं। मैं ये सारा टोकरा भरा हुआ अनार ले सकता हूं। उस नौकर ने अनार से भरा टोकरा खरीद लिया और अपने सिर पर रखकर अपने घर की ओर चल दिया। रास्ते में दूसरा नगर पड़ता था। वहां यह ढंढोरा पीटा जा रहा था कि राजा की रानी बीमार है यदि उसे कोई एक या दो अनार के फल लाकर देगा उसे मुंह मांगा ईनाम दिया जायेगा। उस मनादी को सुनकर नौकर बहुत खुश हुआ। वह बोला मेरे पास बहुत अनार हैं। मुझे राजा के पास ले चलो। मनादी करने वाला युवक उसे अपने राजा के दरबार में ले गया। राजा ने अनार अपनी रानी को खाने के लिये दिया जिसे खाकर रानी ठीक हो गई। राजा ने अनार के बदले उस नौकर को बहुत से सोने चांदी के जेवरात दिये जिससे वह धनवान बन गया और अपने परिवार का पालन पोषण ठीक प्रकार से करने लगा वह अब बहुत सुखी था। कहानी का तात्पर्य यह है कि नेकी की एक रू0 की कमाई आपको वो सुख शांति दे सकती है जिसे आप बेसुमार दौलत होते हुए भी नहीं खरीद सकते।
उपराष्ट्रपति श्री एमवेंकैया नायडु ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता प्राप्त करने के लिए सार्थक प्रयास जारी रखने कीआवश्यकता पर बल दिया है। विश्व में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा के संदर्भ में उपराष्ट्रपति ने इस विषय पर अधिकाधिक विश्वमत कासमर्थन प्राप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार के मुद्दे पर विश्व समुदाय से सतत विमर्शजारी रखना जरूरी है।
वे आज नई दिल्ली स्थित अपने निवास पर भारतीय विदेश सेवा के 2018 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। विदेशसेवा को अपना कैरियर बनाने के लिएप्रशिक्षु अधिकारियों को शुभकामनाऐं देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह सेवा उन्हें भारत कीमहान सभ्यतासांस्कृतिक समृद्धि तथा यहां विकास की असीम संभावनाओं से वृहत्तर विश्व को परिचित कराने का अवसर प्रदानकरेगी।
उन्होंने कहा कि युवा कूटनीतिज्ञ भविष्य के प्रवक्ताअनुवादक तथा विश्व को भारत की विकास गाथा से परिचित कराने वाले सूत्रधार हैंजो आने वाले वर्षों में भारत और वृहत्तर विश्व के बीच परस्पर सम्मानसौहार्दसमझ तथा साझा विकास के सेतु का निर्माण करेंगे।उपराष्ट्रपति ने विदेश सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे भविष्य की भू-राजनीति तथा वैश्विक व्यवस्था को परिभाषितकरेंगे।
प्रशिक्षु अधिकारियों के सामने अपने वाली भावी चुनौतियों की चर्चा करते हुए श्री नायडु ने कहा कि विश्व में बढ़ती संरक्षणवादी प्रवृत्ति नेविश्व के साझा विकास के प्रयासों पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। विश्व में बढ़ते आतंकवाद पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि कोईभी देश इस विपत्ति से निरापद नहीं है। उन्होंने इस वैश्विक आपदा के विरूद्ध संगठित विश्व के साझा प्रयासों का आह्वाहन किया।उन्होंने आतंकवाद के विरूद्ध भारत के दृढ़ संकल्प की सराहना की और अपेक्षा व्यक्त की कि विश्व शांति के लिए हमारे संकल्पनिष्ठप्रयास जारी रहेंगे।

भगौड़े आर्थिक अपराधियों के भ्रष्ट कृत्यों की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने चिंता व्यक्त की कि कुछ देशों में ये भगौडे आर्थिक अपराधीआसानी से निरापद प्रश्रय पा जाते हैं। उन्होंने वैश्विक अर्थतंत्र तथा वृहत्तर सामाजिक हितों को ऐसे अपराधियों के अनैतिक भ्रष्टाचार सेसंरक्षित रखने के लिए द्विपक्षीयबहुपक्षीय समझौतों तथा प्रत्यर्पण संधियों की निरंतर समीक्षा करने की जरूरत पर बल दिया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि सतत विकास के लिए प्रस्तावित एजेंडा 2030 की सफलता के लिए भारत की सक्रिय साझेदारी अपरिहार्य है।उन्होंने कहा कि आधुनिक समस्याओं के निदान के लिए एक वृहत्तर मानवीय दृष्टिकोण अपनाना होगा। श्री नायडु ने कहा कि भारत कीविहंगम विश्व दृष्टि, ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के विराट आदर्श से परिभाषित होती रही है। हम सर्वे भवन्तु सुखिन: ’ की प्रार्थना करते हैं।हमारे उदार उदात्त आदर्श हमें वह नैतिक शक्ति देते हैं कि इन विषम वैश्विक परिस्थितियों में भी हम विश्व संवाद को सार्थक रूप सेप्रभावित कर सकते हैं।
श्री नायडु ने कहा कि भारत तेजी से विकास मार्ग पर अग्रसर है तथा विश्व हमारी विकास गाथा को उत्सुकता से देख रहा है। उन्होंने कहाकि हमें विश्व व्यापारनिवेश तथा इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का भरसक लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने नव प्रशिक्षुओं सेअपेक्षा की कि वे विश्व बाजार की संभावनाओं से लाभ उठाने में भारतीय उद्यमों तथा व्यवसायियों की आगे गढ़ कर सहायत करें तथाभारत में वैश्विक निवेश लाने के प्रयास करें।
हाल में संपन्न 2019 के आम चुनावों की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि जनता ने नि:संदेह स्पष्टता के साथ स्थिरता को चुना है।उन्होंने कहा कि मैं आशा करता हूं कि सभी नागरिक हमारी समृद्ध लोकतांत्रिक परंपराओं को और सुदृढ़ करेंगे तथा अपनी साझा ऊर्जाआर्थिक विकास और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने में लगायेंगे।
उपराष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों से आशा व्यक्त की कि वे अपनी जानकारी और कौशल को निरंतर बढ़ायेंगे तथा जिस देश में नियुक्तहोंगे उसके बारे में सभी जानकारी हासिल करेंगे। उपराष्ट्रपति ने अपेक्षा की कि अधिकारी नियुक्ति वाले देश में उपलब्ध संभावनाओं कापता लगायें तथा उन देशों और भारत के बीच रिश्तों को और प्रगाढ़ करें। इस अवसर पर श्री नायडु ने युवा प्रशिक्षु अधिकारियों कोसत्यनिष्ठाविवेकशीलताकर्तव्यनिष्ठा की सलाह दी। उन्होंने अपेक्षा की कि प्रशिक्षु अधिकारी भविष्य मेंशांतिपूर्ण सहअस्तित्वसतत और समन्वेशी विकास जैसे विषयों पर भारत की नीति के मुखर प्रतिनिधि प्रवक्ता बनेंगे।
इस अवसर पर विदेश सेवा संस्थान के डीन श्री जे.एसमुकुलसंयुक्त सचिव श्री राहुल श्रीवास्तव तथा श्री अमरनाथ दूबे सहित अन्यवरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने भारतीय चिकित्‍सा परिषद (एमसीआई) से राज्‍यों में पीजी मेडिकल दाखिले की तिथि 18 मई से बढ़ाकर 31 मई, 2019 करने का अनुरोध किया है ताकि अकादमिक सत्र 2019-20 में शेष बची सीटों को भरा जा सके।

भारतीय चिकित्‍सा परिषद द्वारा अधिसूचित कार्यक्रम के अनुसार राज्‍यों द्वारा स्‍नातकोत्तर मेडिकल सीटें भरने की अंतिम तिथि 18 मई, 2019 है। मंत्रालय को पीजी मेडिकल सीटें भरने की अंतिम तिथि 18 मई, 2019 से बढ़ाकर 31 मई, 2019 करने के अनुरोध संस्‍थानों/राज्‍य सरकारों से प्राप्‍त हुए हैं।

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने भारतीय चिकित्‍सा परिषद के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स से मामले को देखने और उचित सिफारिश करने का अनुरोध किया है। आज बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में इस पर विचार किया जाएगा।

      सिनेमा में सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने के लिए सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने आज एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज के अध्यक्ष जॉन बैली के साथ नई दिल्‍ली के सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में बातचीत के विषय सत्र का आयोजन किया। सत्र के बाद श्री बैली ने प्रेस के साथ बातचीत की।


  सत्र में श्री जॉन बैली ने एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज में भारतीयों की सदस्‍यता बढ़ाने की आवश्‍यकता के बारे में चर्चा की। उन्‍होंने एकेडमी में विविध सदस्‍यों की संख्‍या दोगुनी करने की एकेडमी की पहल को उजागर किया और कहा कि भारत अवसरोंचुनौतियों और विविधता को एकजुट करने का प्रतिनिधित्‍व करता है। इस बातचीत के जरिए अनेक जन संचार मीडिया संस्‍थानों से आए उभरते फिल्‍म निर्माताओं और छात्रों को न केवल एकेडमी के अध्‍यक्ष श्री जॉन बैली बल्कि मास्‍टर सिनेमेटोग्राफर जॉन बैली से भी बातचीत का अवसर मिला। बातचीत के दौरान न केवल फिल्‍म तकनीक की अग्रणी अवस्‍था में कला की बारीकियों पर प्रकाश डाला गयाबल्कि विश्‍व स्‍तर की विषय वस्‍तु तैयार करने के बारे में भी समझ विकसित करने में सहयोग किया गया। श्री बैली ने उन पर महिला सिनेमेटोग्राफरों के प्रभाव के बारे में भी बातचीत की। भारत की कथाकारों की भूमि के रूप में सराहना करते हुए उन्‍होंने इस बात पर जोर दिया कि फिल्‍म निर्माता निजी कथाओं को तेजी से बताएं। उन्‍होंने एकेडमी के साथ गहरे सहयोग की दिशा में भारत द्वारा दिखाए गए उत्‍साह और उत्‍सुकता की भी सराहना की।

 सूचना और प्रसारण सचिव श्री अमित खरे ने भारत में बड़ी संख्‍या में प्रतिभाओं के होने और क्षेत्रीय भाषा में बनाई जा रही फिल्‍मों में तेजी का जिक्र किया। उन्‍होंने विभिन्‍न राज्‍यों के उभरते हुए फिल्‍म निर्माताओं के सामने रखे जा रहे प्रोत्‍साहनों की जानकारी दी और आशा व्‍यक्‍त की कि श्री बैली और एकेडमी के साथ जुड़ाव से दुनिया भर में भारतीय फिल्‍म निर्माताओं की कला के प्रदर्शन में मदद मिलेगी।


  फिल्‍म प्रमाण पत्र और अपीलीय न्‍याधिकरण के अध्‍यक्ष न्‍यायमूर्ति मनमोहन सरीन ने सिनेमेटोग्राफर के रूप में श्री जॉन बैली की उपलब्धियों को सर्वोत्‍कृष्‍ट बताया।
   सीबीएफसी के अध्‍यक्ष श्री प्रसून जोशी ने बताया कि किस प्रकार सिनेमा भारत में रोजमर्रा के जीवन का हिस्‍सा बन चुका हैयहां तक कि जीवन का दर्शन भी सिनेमा से ही उत्‍पन्‍न होता है। उन्‍होंने वर्तमान रुझान सिनेमा लोकतंत्र’ की तरफ – भारत में प्रौद्योगिकी के जरिए सिनेमा का लोकतंत्रीकरण और उसकी बढ़ती पहुंच की जानकारी दी। उन्‍होंने भारतीय सिनेमा में भावनाओं और संगीत के महत्‍व की भी चर्चा कीजो पश्चिमी देशों के सिनेमा से हटकर है। उन्‍होंने सामूहिक रूप से सिनेमा को देखने के महत्‍व की चर्चा की और भारत के अंतर्राष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह जैसे उत्‍सवों का भी महत्‍व बताया।
राजस्थान के माउंट आबू में 27 मई से दक्षिणी कमान बाल ग्रीष्मकालीन साहसिक शिविर 2019 का आयोजन किया जा रहा है जो 3 जून 2019 तक चलेगा। 8 दिन का यह शिविर युद्ध एक्स डिवीजन के 8 मद्रास बटालियन के तत्वधान में कराया जा रहा है। इस शिविर में भाग लेने वाले बच्चों को उनमें साहसिक कार्यों के प्रति उत्साह पैदा करने और व्यक्तित्व विकास का मौका मिलेगा।
भारतीय सेना की दक्षिणी कमान से लगभग 125 बच्चे इस शिविर में भाग ले रहे हैं। शिविर में बच्चे  ट्रैकिंग, गुफा में रहना, नौकायान, विभिन्न खेल और प्रतियोगिताओं समेत  तरह-तरह के इनडोर और आउटडोर गतिविधियों में भाग लेंगें।
शिविर में बच्चों को अपने स्वभाव को विस्तार देने, नये दोस्त बनाने, नई और विविध रूचियों को विकसित करने और यादगार लम्हें सृजित करने का मौका मिलेगा। शिविर के आयोजकों का प्रयोजन भी बच्चों को नये शौक विकसित करने और उन्हें अपनाने, जिम्मेदारियां उठाने, लक्ष्य तय करने और उन्हें हासिल करने के लिये प्रेरित करना है। इसके लिये योग एवं ध्यान तकनीक से परिचय करना, सुरक्षा से जुड़े विषयों पर जानकारी देना और सामाजिक मर्यादा बढ़ाने जैसी विविध गतिविधियां कराई जाएंगी।
इस शिविर का आयोजन माउंट आबू में भारतीय सेना बच्चों की गर्मी की छुट्टियों के दौरान हर साल कराती है जिससे बच्चों को कुछ नया सीखने और साहसिक कार्यों को करने के लिए एक मंच उपलब्ध कराया जाता है।

       वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बी.एस. धनोआ पीवीएसएम एवीएसएम वाईएसएम वीएम एडीसी ने कारगिल में ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान अपने प्राणों की आहूति देने वाले जवानों के साहस के सम्‍मान में आज चार लड़ाकू विमानों, मिग-21 की ‘मिसिंग मैन’ फॉर्मेशन फ्लाईपास्‍ट की अगुवाई की। पश्चिमी वायु कमान के कमांडिंग इन चीफ और कारगिल के पुराने योद्धा एयर मार्शल आर. नाम्‍बियार पीवीएसएम एवीएसएम वीएम एंड बार एडीसी भी इस फॉर्मेशन का हिस्‍सा थे। ‘मिसिंग मैन’ फॉर्मेशन शहीद साथियों के सम्‍मान में की जाने वाली एक प्रकार की हवाई सेल्‍यूट है। यह एक एरो फॉर्मेशन है। इसमें दो लड़ाकू विमानों के बीच में फासला होता है, जो मिसिंग मैन या लापता शख्‍स को चित्रित करता है। बाद में एक सादगीपूर्ण समारोह में उन्‍होंने कर्तव्‍य निर्वहन करते हुए अपने प्राणों की आहूति देने वाले भारतीय वायु सेना के जवानों के सम्‍मान में युद्ध स्‍मारक पर पुष्‍पांजलि अर्पित की।

      आज ही के दिन 1999 में स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा वीआरसी (मरणोपरांत) आहूजा ने कारगिल संघर्ष के दौरान अपने प्राण न्‍यौछावर किये थे। उस समय वह  17 स्क्वाड्रन के फ्लाईट कमांडर थे।     
      28 मई को वायुसेना प्रमुख सरसावा वायुसेना स्टेशन का दौरा करेंगे और और कारगिल शहीदों के सम्‍मान में एमआई-17 वी5 मिसिंग मैन फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे। 28 मई, 1999 को हमने एमआई-17 हैलिकॉप्‍टर द्रास सैक्‍टर में शत्रु पर सफल आक्रमण करने के बाद गंवा दिया था। स्क्वाड्रन लीडर आर. पुंडीर, फ्लाइट लैफ्टिनेंट एस. मुहिलान, सार्जेंट आर.के. साहू और सार्जेंट पीवीएनआर प्रसाद उस एमआई-17 हैलिकॉप्‍टर की कार्रवाई में शहीद हो गये थे।        


भारतीय वायुसेना ने अपने अग्रिम पंक्ति के एसयू-30 एमकेआई लड़ाकू विमान से आज सफलतापूर्वक ब्रहमोस हवाई प्रक्षेपित मिसाइल छोड़ा। विमान से प्रक्षेपण आसानी से हुआ और मिसाइल जमीन पर लक्ष्य को सीधे मारने से पहले वांछित प्रक्षेपपथ पर चला गया।
हवाई प्रक्षेपित 2.5 टन का ब्रहमोस मिसाइल हवा से जमीन पर मार करने वाला सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 300 किलोमीटर है। बीएपीएल ने इसका डिजाइन तैयार किया है और इसे विकसित किया है। भारतीय वायुसेना दुनिया की पहली वायुसेना बन गई है, जो इस श्रेणी के जमीन पर हमला करने वाले समुद्र पर लक्षित 2.8 मैक मिसाइल को 22 नवंबर, 2017 को सफलतापूर्वक छोड़ चुकी है। आज इस तरह के हथियार का दूसरी बार प्रक्षेपण किया गया। विमान में इस हथियार को जोड़ना एक जटिल प्रक्रिया थी, क्योंकि विमान में मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और सॉफ्टवेयर में सुधार की आवश्यकता थी। भारतीय वायुसेना अपने अस्तित्व में आने के बाद से इस कार्य में लगी हुई है। विमान के सॉफ्टवेयर को विकसित करने का काम भारतीय वायुसेना के इंजीनियरों ने अपने हाथ में लिया, जबकि एचएएल ने मैकेनिकल और इलेक्ट्रोनिकल सुधार किए। भारतीय वायुसेना, डीआरडीओ, बीएपीएल और एचएएल के समर्पित प्रयासों ने ऐसे जटिल कार्यों को हाथ में लेने की देश की क्षमता को साबित कर दिया है।
ब्रहमोस मिसाइल दिन अथवा रात तथा हर मौसम में भारतीय वायुसेना को समुद्र अथवा जमीन पर किसी भी लक्ष्य को सटीक निशाना बनाने की क्षमता प्रदान करता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय म‍ंत्रिमंडल ने आज राष्‍ट्रपति से 16वीं लोकसभा भंग करने की सिफारिश की। सोलहवीं लोकसभा का गठन 18 मई, 2014 को हुआ था।

पृ‍ष्‍ठभूमि:
     संविधान के अनुच्‍छेद 83 के उपबंध (2) के तहत यह प्रावधान किया गया है कि यदि गठन के बाद पहली बैठक के 5 साल पूरे होने पर लोकसभा भंग नहीं की जाती तो उसे स्‍वत: भंग माना जाएगा। विशेष परिस्थितियों में मध्‍यावधि चुनाव होने पर लोकसभा समय से पूर्व भंग की जा सकती है। सोलहवीं लोकसभा की पहली बैठक 4 जून, 2014 को हुई थी जब सदस्‍यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई थी। मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल 3 जून, 2019 को समाप्‍त हो रहा है।
     पहली से लेकर 15वीं लोकसभा के गठन और उसके कार्यकाल की समाप्ति तथा उसे भंग किए जाने और आम चुनावों के म‍तदान संपन्‍न होने की तिथि का ब्‍यौरा:-

(पहली से लेकर 15वीं लोकसभा)
मतदान की अंतिम तारीख
गठन की तिथिपहली बैठक की ति‍थिकार्यकाल समाप्‍त होने की तिथि (संविधान के अनुच्‍छे 83(2) की व्‍यवस्‍था के अनुरूप )
भंग किए जाने की तिथि
1

2

3

4

5

6

पहली
21.02.1952
02.04.1952
13.05.1952
12.05.1957
04.04.1957
दूसरी
15.03.1957
05.04.1957
10.05.1957
09.05.1962
31.03.1962
तीसरी
25.02.1962
02.04.1962
16.04.1962
15.04.1967
03.03.1967
चौथी
21.02.1967
04.03.1967
16.03.1967
15.03.1972
*27.12.1970
पांचवी
10.03.1971
15.03.1971
19.03.1971
18.03.1977
*18.01.1977
छठी
20.03.1977
23.03.1977
25.03.1977
24.03.1982
*22.08.1979
सातवीं
06.01.1980
10.01.1980
21.01.1980
20.01.1985
31.12.1984
आठवीं
28.12.1984
31.12.1984
15.01.1985
14.01.1990
27.11.1989
नौंवी
26.11.1989
02.12.1989
18.12.1989
17.12.1994
*13.03.1991
दसवीं
15.06.1991
20.06.1991
09.07.1991
08.07.1996
10.05.1996
ग्‍यारहवीं
07.05.1996
15.05.1996
22.05.1996
21.05.2001
*04.12.1997
बारहवीं
07.03.1998
10.03.1998
23.03.1998
22.03.2003
*26.04.1999
तरेहवीं
04.10.1999
10.10.1999
20.10.1999
19.10.2004
*06.02.1904
चौदहवीं
10.05.2004
17.05.2004
02.06.2004
01.06.2009
18.05.2009
पंद्रहवीं
13.05.2009
18.05.2009
01.06.2009
31.05.2014
18.05.2014
सोलहवीं
12.05.2014
18.05.2014
04.06.2014
03.06.2019

सत्रहवीं
19.05.2019





* 1. मध्‍यावधि चुनाव कराया गया। चुनाव से पहले ही लोकसभा भंग कर दी गई। 
2. कॉलम (2) में दी गई मतदान की तिथियां निर्वाचन आयोग से प्राप्‍त रिपोर्ट पर आधरित हैं